23.10.11

शुभ दीपावली


जले तो प्यार में, मरे भी तो प्रकाश में  
जले तो अज्ञान जले, अंतस का अहंकार हारे
दीपज्योती की है यह सीख 
 खुद जल ताकि मन  हो  गंगाजल सा निर्मल 
मन  की  जलन  बदल जाये बुराई के दहन में 
जीवन इसी का नाम है  

13.10.11

जूनको फुरुटा को समर्पित - अत्याचारी मुक्त क्यों है ?





औरत तू चुप क्यों है?  
तेरा हत्यारा मुक्त क्यों है?
आज ये, कल वो 
कभी अपने आँगन तो कभी दूजे आँगन 
तुझ पर रख बुरी नजर
वो अत्याचारी मुक्त क्यों है?

काली बन विनाश कर 
बिजली बन आघात कर 
तू चपला तू चंचला
तू विश्व की रचियता
किसका बैठी इंतज़ार कर 
जोर का प्रहार कर 

ह्रदय दहले काँप कर 
ऐसी तू हुँकार  कर 
न झुकी है तू 
ना झुकेगी तू 
अपमान कभी ना स्वीकार कर
काली बन विनाश कर
बिजली बन आघात कर