आरोग्य


मूंगफली के प्रतिरोधक, औषधीय एवं चिकित्सकीय गुण
























मूंगफली में उपस्थित विभिन्न पोषक तत्व और एंटी ओक्सिडेंट ह्रदय के लिए लाभकारी हैं. मूंगफली से ऊर्जा बढती है. इसमें कैंसर का खतरा कम करने के गुण भी मौजूद हैं. 

मूंगफली का ग्लाईसेमिक सूचकांक कम है अतः यह मधुमेह (प्रकार-२) होने के खतरे से भी हमें बचाता है. 

स्वास्थ्यप्रद मूंगफलियों का आप नाश्ते में भूंज कर, दही के साथ जमाकर, सलाद में कूटकर मिलाकर, सैंडविच में उबली हुई सब्जियों के साथ, पाई,कुकीज़ के साथ और पीनटबटर के रूप में सेवन कर सकते हैं.  

 मूंगफली के प्रतिरोधक गुण -

- मूंगफली में एंटी वायरल , एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं. 
- इसका प्रयोग एक चम्मच दिन में पांच बार करने से वजन बढाने में सहायता मिलती है. 
- हालाँकि जिनका वजन ज्यादा है उन्हें मूंगफलियों के सेवन से परहेज करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि शोध कहता है कि जो लोग दिन में दो बार मूंगफलियों का सेवन करते हैं उनका वजन बढ़ने की सम्भावना उन लोगों की तुलना में कम होती है जो मूंगफली का सेवन नहीं करते हैं.
- मूंगफली मस्तिष्क तक रूधिर संचरण सुचारू रखने में मदद करती है जिससे मस्तिष्क संघात की संभावना कम हो जाती है. 
- मूंगफली में नियासिन होता है जिससे अल्जाइमर रोग से रक्षा होती है और यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाता है. 
- मूंगफली से नर-मादा हार्मोन्स में भी वृद्धि होती है. 

मूंगफली के औषधीय गुण -

- अपच की समस्या से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन सुबह २-३ चम्मच पीनट बटर और गुड़ का सेवन करना चाहिए.
- प्रतिदिन एक मुट्ठी मूंगफली (छिलका सहित) का सेवन करने से ह्रदय की बिमारियों से मुक्ति मिलती है. 
- प्रतिदिन २ चम्मच पीनट बटर का उपभोग करने से अस्थिभंगुरता से राहत मिलती है.
- मूंगफली तनाव कम करती है और मनः दशा सुधरती है. मूंगफली को गेहूं की ब्रेड में पीनट बटर, जेम, जैली लगाकर खाएं.  
- दांत के दर्द में पीनट बटर और लौंग पीसकर लेप बनायें और दांतों पर मालिश करें, लाभ मिलेगा. 
- पीनट बटर और थोड़ी सी शक्कर का मिश्रण याददाश्त बढाता है.
- हिचकी आने पर पीनट बटर का प्रयोग करें, लाभ होगा. 

* शरीर में नासूर घाव होने की दशा में पीनट बटर का प्रयोग निषिद्ध है. 

 मूंगफली के चिकित्सकीय गुण - 

 - टेपवर्म से छुटकारा पाने के लिए १५ दिनों तक लगातार सुबह एक चम्मच पीनट बटर का प्रयोग करें. यह एक प्राकृतिक उपाय है. 
- त्वचा से स्ट्रेच मार्क्स मिटाने हेतु २ चम्मच पीनट बटर और क्रेस्को तेल (कपास के बीज का तेल) मिलकर १५ मिनट तक मालिश करें फिर धो दें. यह विधि दिन में एक बार एक सप्ताह तक प्रयोग करें. 
- शुष्क त्वचा को कांतिमय करने हेतु पीनट बटर से १५ मिनट तक चेहरे में हलकी मालिश करें तथा  गुनगुने पानी से धो लें. 
- झुर्रियां कम करने के लिए मूंगफली के तेल में गुलाब का तेल मिलाकर प्रयोग करें . इससे त्वचा को पोषण मिलेगा.
- समान मात्रा में मूंगफली का तेल और कर्पूरयुक्त तेल की मालिश करने से त्वचा से चोट के निशान हलके हो जाते हैं. 
- मूंगफली के तेल से मालिश करने मात्र से थकान, अल्प रक्त संचरण, जीवन शक्ति में कमी जैसी तकलीफों में आराम मिल जाता है. 

 * मूंगफली का दूध मूंगफली और पानी से तैयार बेहद महत्वपूर्ण दुग्धरहित पेय है . लक्टोज़ के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है.  





















स्वास्थ्य पर सद्गुरु के विचार

इस लेख में सद्गुरु बताते हैं कि स्वास्थ्य का आधार व्यक्ति की अपनी ऊर्जा में निहित होता है।

मूलरूप से शब्द 'Health' बना ही है शब्द 'Whole' से. जब हम कहते हैं कि  हम स्वस्थ महसूस कर रहे हैं तब हमारे अन्दर पूर्णता (wholeness) का भाव रहता है। यदि हम चिकित्सकीय रूप से रोगों से मुक्त हैं तो इसका यह तात्पर्य नहीं है कि हम स्वस्थ हैं। हम केवल तभी शरीर, मन और आत्मा तीनों से एक पूर्ण मनुष्य की तरह महसूस करते हैं जब हम वास्तव में स्वस्थ होते हैं। यदि कोई अपने अन्दर पूर्णता या एकत्व की भावना का अनुभव करना चाहता है तो यह अनिवार्य है कि उसका शरीर, मन और इनसे भी पहले, ऊर्जा का एक निश्चित स्तर अपने अन्दर कार्य करे. अब, चिकित्सकीय रूप से कोई व्यक्ति स्वस्थ हो सकता है परन्तु उसका ऊर्जा स्तर शक्तिहीन स्तर पर हो सकता है. व्यक्ति यह नहीं समझ पाता है कि चीज़ें उस तरह से क्यों नहीं काम कर रही हैं जैसी कि उन्हें करना चाहिए, अन्दर और बाहर दोनों स्तरों पर ; ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यक्ति अपनी ऊर्जा की अच्छी तरह से देखभाल नहीं कर रहा होता है.

अपने जीवन में आप जितनी भी शारीरिक और मानसिक परिस्तिथियों से गुजरते हैं उनका आधार ऊर्जा होती है जोकि एक रासायनिक आधार में बदलती है. जब यह बात स्वास्थ्य पर आती है तो कोई भी मनुष्य आदर्श परिस्तिथियों में नहीं रह सकता है. जीवन के दबाव, जो खाना हम खाते हैं, वायु जिसका श्वसन करते हैं, जो पानी हम पीते हैं, कई तरह से हमें प्रभावित करता है. दुनिया में जितनी ज्यादा हमारी गतिविधियाँ रहेंगी उतना ज्यादा हम ऐसी चीज़ों के संपर्क में आयेंगे जो हमारा ऊर्जा संतुलन बिगाड़ देंगी और स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा करेंगी. परन्तु यदि हमारे ऊर्जा तंत्र को उचित रीति से संवर्धित किया जाये और उसे सक्रिय रखा जाये तो इन बातों का कोई प्रभाव नहीं होगा.

इस प्रकार, योग में, जब हम कहते हैं स्वस्थ, तो हम न शरीर को देखते हैं और न ही मन को देखते हैं, हम केवल ऊर्जा को देखते हैं- जैसी की वह है. यदि आपके ऊर्जा शरीर में उचित संतुलन और पूर्ण प्रवाह है तो आपका भौतिक शरीर और मानसिक शरीर भी पूर्णतः स्वस्थ होगा. ऐसा न होने का प्रश्न ही नहीं है. ऊर्जा शरीर को पूर्ण प्रवाह में रखने का अर्थ किसी प्रकार की हीलिंग करना या वैसा कुछ करना नहीं है. इसका तात्पर्य है, ऊर्जा शरीर के आधार पर जाना और इसे भली प्रकार से कार्यरत रखना, आधारभूत योगाभ्यास करना जिससे आपकी ऊर्जा इस प्रकार स्थापित हो जाये कि मन और शरीर स्वाभाविक रूप से ठीक रहें.

देखिये, जीवन अनेक तरह से कार्य करता है. चलिए मान लेते हैं कि आप नहीं जानते कि विद्युत्  क्या है ? इस हॉल में अँधेरा है. अब यदि मैं आपसे कहूँ कि मात्र एक स्विच दबाने से यह हॉल प्रकाश से जगमगा उठेगा तो क्या आप मेरी बात पर विश्वास करेंगे ? नहीं. अब, यदि मैं इस स्विच को दबाता हूँ तो प्रकाश दिखेगा. आप इसे चमत्कार कहने लगेंगे , है कि नहीं ? सिर्फ इसलिए क्योंकि आप जानते ही नहीं हैं कि विद्युत् कैसे कार्य करती है. इसी प्रकार, जीवन के  भी अनेक तरीके होते हैं. आप स्वयं को केवल  शारीरिक और तार्किक अनुभव तक सीमित रखते हैं - शारीरिक अनुभव और तार्किक विचार.

यह ऊर्जा शरीर जो आपका पूरा शरीर बनाता है - यह हड्डियाँ, यह माँस, यह ह्रदय, यह गुर्दे और सबकुछ. क्या आपको लगता है कि यह स्वास्थ्य का निर्माण नहीं कर सकता है ? यदि आपकी ऊर्जा को पूर्ण प्रवाह और उचित संतुलन में रखा जाये तो यह मात्र स्वास्थ्य से कहीं अधिक देने में सक्षम है.
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रूद्राक्ष 

रूद्राक्ष तनाव, चिंता, अवसाद और एकाग्रता की कमी में सुधार हेतु सकारात्मक प्रभाव डालता है. यह शरीर के तापमान को कम करता है और मन को शांत करता है.यह हिस्टीरिया से पीड़ित लोगों के लिए भी उपयोगी है. दूध के साथ रूद्राक्ष के बीज का पेस्ट का प्रयोग करने से लंबे समय तक खांसी से राहत मिलती है. यह त्वचा रोग, घाव, दाद, मुँहासे, फोड़े और जलने के लिए एक इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. रूद्राक्ष में जीर्णावस्था रोकने के भी गुण समाहित हैं.
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JUJUBE FRUIT / ILANDHAI PAZHAM

Jujube fruit benefits are mainly offered by the nutrients present in it - high in vitamin A, C and potassium, it strengthens the immune system of the body. It helps in the formation and maintenance of the blood stream, body hormones, bones, muscles, skin, hair, body enzymes and neurotransmitters. It is also loaded with 18 out of the 20 important amino acids. It helps in the formation of more than 50,000 proteins of the body. All this, actually triggers the wound healing process.

It has soothing effect on the nervous system and acts as a natural sedative & relieves stress and anxiety. Jujube fruit helps lower blood pressure and helps cure some of the liver diseases. It is found that the jujube offers protection against liver injury by acting as an antioxidant.

One of the most important benefits is that it inhibits the growth and movement of free radicals. Vitamin C is a good antioxidant and helps to control the growth of the tumor causing cells and cells that can lead to cancers. The berries are blood purifier and an aid to digestion.
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