25.9.11

फिर हुई एक देवी की अवहेलना

बिलासपुर. अरपा नदी के पुल के नीचे एक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनकर भीड़ इकठ्ठा हो गई, पास में ही सिम्स अस्पताल में उसे भर्ती कराने पर पता चला कि यह बच्ची कुछ ही घंटे पहले पैदा हुई है और नियत समय से कुछ पंद्रह दिन पहले पैदा हुई है. बच्ची का वजन मात्र दो किलोग्राम  है.  पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है परन्तु चार दिनों बाद भी पुलिस यह नहीं पता लगा पाई है कि ये बच्ची किसकी है? यह अभी तक पता   नहीं चल सका है कि किस कारण से बच्ची को ऐसी दयनीय हालत में छोड़ा गया है? क्या यह उसके लड़की होने का कसूर है या कोई और वजह है .
  नवरात्र पर ऐसी घटना एक तरह की घृणा और शर्मिंदगी पैदा करती है. हम लड़की को क्यों छोड़ देते हैं? वो देवी हैं, लड़कों से ज्यादा अपने माता-पिता के प्रति लगाव रखती हैं और उनके काम आने को तत्पर रहती हैं. आज की लड़कियाँ घर और बाहर दोनों के काम संभालती हैं. क्या यह प्रत्येक नारी का दैवीय रूप नहीं है, एक हाथ में बच्चा, दूसरे में कडाही, तीसरे में ऑफिस की फाइल और चौथे में समाज सेवा का काम , यह कोई साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है. और यदि नाजायज सम्बन्ध ऐसी घटना के जिम्मेदार हैं तो कहाँ है वो मर्द जो तनिक भी जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहता है? 
  असली माता-पिता का तो पता नहीं परन्तु कई निःसंतान दम्पत्तियों ने अवश्य उस नवजात प्यारी सी बच्ची को गोद लेने के लिए अस्पताल प्रशासन से  बात की है जो उक्त बच्ची के माता-पिता की तरह दिनरात उसकी देखरेख कर रहें हैं. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वो बच्ची को मातृछाया को सौंप रहें है और जो दम्पती बच्ची को गोद लेना चाहते हैं उन्हें जिले के एस डी एम को अपनी सिफारिश सौंपनी होगी. देखिये, दुनिया का खेल, यहाँ कौन अपना है और कौन पराया कह नहीं सकते. जिन्होंने जन्म दिया उन लोगों ने तो मुंह फेर लिया वहीँ जिनका उस बच्ची से कोई नाता नहीं वो उसे अपनाने के लिए तड़प रहे हैं. 


त्यौहार और परीक्षा की दोहरी तैयारी एक साथ कैसे करें?

इस हफ्ते गृहणियों के लिए ऐसी चुनौती आ रही है जिसके बारे में सोचकर ही बुखार चढ़ जाता है, माँ दुर्गा का पवित्र नवरात्री का त्यौहार और बच्चों की परीक्षा दोनों ही एकसाथ है और दोनों ही चुनौतियों में खरा उतरना प्रत्येक गृहिणी का सपना होगा ऐसे में हम आपकी सहायता करेंगे यह समझाने में कि क्या करें कि त्यौहार का काम और खुशियों के साथ-साथ बच्चों की परीक्षा की भी अच्छी तैयारी करवाई जा सके. 

  1. काम को तेजी के साथ योजना बनाकर निपटाएं.
  2. थोडा वक़्त थकान दूर करने और मनोरंजन के लिए भी निकालें.
  3. समय बर्बाद करने वाले लोगों से दूर रहें तथा उन्हें स्पष्ट कर दें कि आप अभी व्यस्त हैं अतः बाद में समय निकालकर उनसे अवश्य बात करेंगी. आपके इस स्पष्ट और मित्रतापूर्ण व्यवहार से आपका समय भी बचेगा और सम्बन्ध भी कटु नहीं होंगे.
  4. जरुरत के सामान की एक सूची बना लें ताकि पूजा की सभी सामाग्री उपलब्ध हो और पढाई के समय बच्चों को बार-बार काम के लिए ना उठाना पड़े. 
  5. बच्चों से बात कर अपना और उनका टाइम टेबल सेट कर लें ताकि आप एक-दूसरे के काम आयें और बेवजह नाराज होकर त्यौहार का मजा किरकिरा ना करें.
  6. बच्चों को रचनात्मक ढंग से काम करने की छूट दें ताकि वो उत्साह के साथ काम करें और धैर्य बनाये रखें ताकि आपसे यह व्यवहार आपके बच्चे भी सीखें और तनाव के समय में भी संयत व्यवहार करें. 
  7. बच्चों के पढ़ते समय गुस्से में ना चिलायें, इससे उनकी पढाई और समय दोनों खराब होगा और वो आपका काम अनमने ढंग से करेंगे.
  8. अपने बच्चों को हल्का खाना दें और थोड़ी थोड़ी देर में कुछ हल्का नाश्ता देते रहें जो वो खुद तैयार कर सकें ताकि आपको अपने काम के लिए भी समय मिल सके. 
  9. व्रत में उतनी ही कठोरता रखें जितना साध पायें , भगवान् भक्ति से प्रसन्न होते हैं अतः बीमारी या कमजोरी में कठोर व्रत ना रखे.

20.9.11

मुसीबतों से क्या डरना?

 क्या आप अपने जीवन को संकटग्रस्त देखकर हताश हो रहे हैं? क्या आपको ऐसा लगता है कि अब इस रात की सुबह नहीं होगी? तो समझ लीजिये कि बस अब सुबह होने को ही है और सुबह का सूर्य अपनी आभा आपके जीवन में बिखेरने के लिए बस आ ही गया है. वेदों में भी कहा गया है कि जितना सघन कीचड़ होगा उतना ही अधिक उसमे कमल के खिलने की संभावना अधिक होगी अर्थात जीवन एक नए और सफल आयाम पर पहुँचने के पहले बेहद स्याह पहलू से होकर गुजरता है.
आइये जानें कि जीवन के इस पल का कैसे सामना करें?
  1. हर हाल में हौसला बनाये रखें चाहे समस्या आर्थिक, शारीरिक या पारिवारिक क्यों न हो. कहते हैं न कि आधी जीत तो बुलन्द हौसलों से ही मिल जाती है.
  2. सदा प्रसन्न रहें और ईश्वर के दिए अनमोल उपहार याने अपने हंसमुख स्वभाव और शारीर पर तनाव का असर ना पड़ने दें.
  3. वैज्ञानिक शोध के द्वारा, यह सिद्ध हो चुका है कि जो लोग तनाव पर हावी हो जाते हैं वही तनावमुक्त और सफल जीवन जीते हैं जैसे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम् एस धोनी. 
  4. शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए नियमित खानपान रखें और योगाभ्यास करते रहें. इससे अनेक तरह के तनावों से छुटकारा मिलेगा. इससे दिनचर्या नियमित होगी जिसका लम्बे समय में बहुत लाभ मिलेगा.
  5. सबके सामने अपनी परेशानियों का रोना रोने की बजाये एक भरोसेमंद राजदार बनाये ताकि मन भी हल्का हो सके और अपने मित्र की सहायता से अपनी परेशानी का हल भी खोज सकें.
  6. अपने समय और धन को नेक कार्यों में लगायें ताकि बुरे वक़्त में ये आपका संबल बनें. किसी की सहायता करने से मन शांत होता है और सकारात्मकता भी बढती है. 
  7. सृजनशील व्यक्ति सदैव प्रसन्नचित्त रहता है क्योंकि वो अपनी नकारात्मकता और बोरियत को नवीनता में बदल देता है अतः सृजनशील बनें. 
  8. अपनी सांगत में ऐसे लोगों को शामिल करें जिन्हें जीवन का व्यापक अनुभव हो और वो सकारात्मक हों ताकि उनका असर आप पर भी हो और आपका जीवन सही दिशा में चलता रहे.
  9. धन की बचत करें ताकि वह बुरे वक़्त में काम आये और संवेदनाओं का निवेश करें ताकि वे सामाजिक और  व्यक्तिगत जीवन में आपके लिए सफल और सुरक्षित मार्ग का काम करें.
  10. अच्छे  व्यवहार से सब प्रसन्न होते हैं अतः बात - बात पर खीज कर और मुसीबतें बढाने की बजाये हंसमुख बने रहे.

टोनही प्रथा की सच्चाई क्या है?




१२ सितम्बर को गणेश विसर्जन के दौरान किसी ने नहीं सोचा था कि वो लीलावती का आखिरी दिन है. एक गरीब विधवा स्त्री का गला उसके पडोसी ने यह इल्जाम लगाकर काट दिया कि वह टोनही है और उक्त स्त्री की ही वजह से जेठू कौशिक(हत्यारा) के घर में लगातार मौतों का सिलसिला चल रहा है. माना जाता है कि टोनही प्रथा बिहार , छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश , बंगाल के गाँव में पाई जाती है परन्तु दिनदहाड़े बिलासपुर शहर में हुई यह पहली वारदात थी.

कानून के मुताबिक, किसी महिला को टोनही सिद्ध करने के लिए यह साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ता है कि वह किसी एक ख़ास परिवार के विरुद्ध जादू टोने का प्रयोग कर उन्हें हानि पहुँचाने का प्रयत्न करती है ताकि उक्त औरत के खिलाफ कार्यवाही की जा सके. परन्तु ऐसा देखा गया है कि टोनही प्रताड़ना प्रायः उन औरतों को झेलनी पड़ती है जो विधवा हैं और अकेले रहती हैं. उनकी जायदाद हड़पने या दुष्कर्म करने की नियत से सामर्थ्यशाली पुरुष ऐसे अनर्गल आरोप लगाकर अकेली महिला को परेशान करते हैं ताकि उसका समाज में जीना दूभर हो जाये. इन परिस्तिथियों से तंग  होकर वह स्वयं कहीं और चली जाये ताकि उसकी संपत्ति पर  कब्ज़ा किया जा सके तथा शारीरिक शोषण सरलता से किया जा सके. 

कानून इस मामले में खामोश नहीं है. किसी महिला को टोनही प्रताड़ना देने वाले व्यक्ति को ५ से १० वर्ष तक कि सजा हो सकती है और हत्या करने कि स्तिथि में धरा ३०४ के तहत हत्या का मुकदमा चलाया जाता है. टोनही प्रथा हमारे समाज पर एक कलंक है जिसे हमें मिटाना होगा. इसके लिए आवश्यक है कि हम महिलाओं के प्रति उदार नजरिया रखें तथा उनकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें. ऐसे लोगों को हर स्तर पर बेनकाब करने की जरुरत है जो स्त्री को अबला समझ कर उसके साथ खेलने का प्रयास करते हैं. टोनही प्रथा भारत ही नहीं अपितु अन्य देशों में भी डायन प्रथा के रूप में विद्यमान है जिसका उन्मूलन स्त्री शिक्षा के द्वारा ही किया जा सकता है. प्रत्येक स्त्री चाहे गरीब हो या अमीर, पढ़ी-लिखी हो या अनपढ़  समझना ही होगा की उसे अपने हक के लिए और उसके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खुद  लड़ना है.   

११ अक्टूबर , २०१२ 
आज लीलाबाई कश्यप को न्याय मिल गया और दोषियों को सजा.

इस मामले में अदालत ने तीनोंआरोपियों को भादवि की धारा 302, 34 के तहत आजीवन कारावास एवं 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी है। वहीं टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम की धारा 4 के तहत उन्हें एक साल कारावास व 5-5 सौ रुपए जुर्माने से दंडित किया है। आम्र्स एक्ट की धारा 25 (1), (1 ख), ख के तहत 3 साल सश्रम कैद एवं 5-5 सौ रुपए जुर्माना किया गया है। धारा 27 (1) आयुध अधिनियम के तहत आरोपी बाप-बेटों को 3 साल कारावास एवं 1-1 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। 

14.9.11

BHRASHTACHAAR PAR KAREN PRAHAR

मानव जाति ने अपने अस्तित्व और प्रसार के लिए अनेक युद्ध लड़े हैं, राजशक्ति से, पडोसी से, भाई से और यहाँ तक की जानवरों से भी परन्तु यह पहली बार देखने में आ रहा है कि अच्छाई और बुराई के बीच  जंग भ्रष्टाचार जैसे आत्मार्पित विषय पर हो रही है वो भी १२१ करोड़ जनसँख्या वाले लोकतांत्रिक देश में | आश्चर्य इसलिए हो रहा है की लोकतंत्र को अक्सर भीड़ तंत्र कहा जाता है, ऐसी व्यवस्था जिसमे सबको बोलने की आजादी है और इसलिए कभी किसी विषय पर जनता का एकमत होना संभव नहीं होता है |


इसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था का फायदा उठाते हुए हमारे हुक्मरान  आज तक हमें आपस में धर्म, जाति के नाम पर  लड़वाते रहे हैं | उन्हें पता है की भारत की जनता की याददाश्त बहुत कमजोर है और यह भी कि हम आपस में ही लड़ने में सिद्ध हस्त हैं | यह सच है कि सिविल सोसायटी कुछ ५ लोगों का एक छोटा सा समूह है जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करता है परन्तु यह भी सच है की हम अन्ना हजारे, किरण बेदी, जस्टिस हेगड़े पर शक भी नहीं करते | अरविन्द केजरीवाल आज युवाओं के पसंदीदा नेता के रूप में उभर रहे हैं और भूषण परिवार अपनी चतुराई से सरकारी दांव-पेंच संभालने में सक्षम साबित हो रहे हैं वहीं सरकार के पक्ष से कपिल सिब्बल सरकार की किरकिरी करा रहे हैं | ऐसे में, जनता के लिए यह सुनहरा अवसर है जब वह एक मंच पर खड़ी होकर आपस में ना लड़े और सबकी भलाई चाहने वाले इस समूह को अपना पूर्ण सहयोग दे | 

नई पीढी को राजनीति से पूर्णतः विमुख होने से बचाने में सिविल सोसायटी का योगदान कोँग्रेस के युवराज राहुल गाँधी से कहीं ज्यादा है और सच तो यह है की बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के अनशन ने राहुल गाँधी के निम्न वर्ग के प्रति प्रेम की सच्चाई उजागर कर दी है | भ्रष्टाचार केवल ए .राजा, कलमाणी और येदियुरप्पा  की बपौती नहीं है, कई दशकों से ये एक रिवाज का रूप ले चुका है जो की देश के गरीब तबके को बहुत कष्ट दे रहा है | कहाँ से ये गरीब तबका अपनी नौकरी के लिए रिश्वत लाये? कहाँ से ये गरीब जनता घर और दुकान लगाने के लिए बाबुओं को पैसे खिलाये? दवा, दूध, तेल जैसी जीवनोपयोगी वस्तुओं में हो रही मिलावट केवल त्योहारों में पकड़ी जाती है, बाकी साल का क्या जब ये लोगों की जान से खेल रहे होते है? सिविल सोसायटी द्वारा प्रस्तुत तर्क कि लोकपाल निम्न स्तर के अधिकारीयों पर भी लागू हो पूरी तरह सही है | 

कोई तो उपाय होना चाहिए जिससे कि भ्रष्टाचार में लिप्त बाबुओं के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही की जा सके और उन्हें उनके किये की सजा दी जा सके | ऐसे में सरकारी लोकपाल बिल की पंगुता यही दर्शाती है कि नेता अभी तक जनता का मिजाज नहीं समझ पाए हैं अपितु सभी दलों को समर्थन में लेकर अन्ना के १६ अगस्त के उपवास को भी बाबा रामदेव के आन्दोलन की ही तरह कुचलना चाहते हैं | सोचिये तो जरा, हमारे देश में गांधीजी के प्रमुख अस्त्र अनशन को करने के लिए सरकार सिविल सोसायटी को जगह तक उपलब्ध नहीं करा रही है, क्यों भला? जब हजारों लोग फ़िल्मी सितारों का शो देखने जा सकते हैं, भारत -पाक के मैच देखने जा  सकते  हैं तो देश की भलाई के लिए हो रहे अनशन का हिस्सा बनने के लिए क्यों एकत्रित नहीं हो सकते हैं ? अन्ना हजारे ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वो पूर्णतः अहिंसक आन्दोलन करना चाहते हैं जो व्यवस्था के खिलाफ है ना कि यूपीए के खिलाफ |

मेरी राय में, सरकार को बिना डरे जनता की  इस पहल का स्वागत  करना चाहिए और संसद में एक अच्छा मसौदा पेश करना चाहिए क्योंकि समय के साथ परिवर्तन अवश्यम्भावी है | अधिकारों से युक्त लोकपाल सभी दलों के काम आएगा, जनता का अमूल्य धन विदेशी बैंकों में ना जमा होकर देश कि संचित निधि में जमा होगा और विकास में उसका सही उपयोग होगा | हालाँकि यह सच है कि कागज़ में लिखी बातें जब हकीक़त से रूबरू होती हैं तो उतनी असरदार नहीं दिखती हैं पर कहते हैं ना, ना मामा से काना मामा अच्छा | देश एक अच्छी लोकपाल व्यवस्था चाहता है जिसमे निम्न से उच्च वर्ग तक सभी जनसेवक शामिल होने चाहिए, यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट के जज और प्रधानमत्री भी, साथ ही लोकपाल की कार्यप्रणाली पारदर्शी और दबाव रहित हो और एक निश्चित समय में जनता को न्याय दे सके | अब जनता की बारी है 'सरकार' को यह दिखाने की कि हम और भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे | हम जहाँ हैं वहीँ से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ेंगे और अपने स्तर पर देश के इस 'दुश्मन' को भगा कर रहेंगे | सभी देशवासियों को इस मुद्दे पर सरकार द्वारा आन्दोलनकारियों के प्रति किये जा रहे दुष्प्रचार का और अत्याचार मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए और भ्रष्टाचार पर ऐसा प्रहार करना चाहिए कि यह दानव फिर कभी बेशरमों कि तरह हमारे देश के सामने ना आ सके |

भ्रष्टाचार का अंत कैसे हो ?

देश घोटालों की बौछार से त्रस्त है और ऐसे समय में अन्ना हजारे जैसे स्वच्छ चरित्र के व्यक्ति का भ्रष्टाचार के विरोध में जन सैलाब खड़ा कर देना ऐसा सुअवसर है इस पीढ़ी के लिए, जिसका भरपूर प्रयोग किया जाना चाहिए | जापान और कुछ यूरोपीय देशों में ईमानदारी राष्ट्रीय चरित्र है, हमारे यहाँ भी था, जो अब पुनः प्राप्त किया जा सकता है | इसके लिए निम्नलिखित कदम भारतीयों को उठाने होंगे -
  1. प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को ईमानदार बनाए रखे और छोटी से छोटी ईमानदारी को भी प्रोत्साहन दे | 
  2. प्रत्येक स्तर पर भ्रष्टाचारियों का असहयोग किया जाये तथा उनको भ्रष्टाचार करने से रोकने का शांतिपूर्ण प्रयास किया जाये | 
  3. आर टी आई का सभी दफ्तरों में कडाई से पालन किया जाये |
  4. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत करने वालों को सुरक्षा मुहैया कराई जाये |
  5. छः माह से एक वर्ष के अन्दर भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई पूरी की जाये | 
  6. भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर नॉन-बेलेबल वॉरंट जारी किया जाये |
  7. आरोप सिद्ध होने की दशा में कठोर कारावास की सजा के साथ ही पूर्व प्रदान की गई उपाधियों को वापस लेने का भी प्रावधान किया जाये |
  8. लोकपाल और लोकायुक्त को आम जनता की आवश्यकताओं को देखते हुए कार्यक्षेत्र प्रदान करें तथा उन्हें स्वतंत्र, राजनितिक हस्तक्षेप से मुक्त और अधिकार संपन्न किया जाये |
  9. सभी राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी तथा कर्मी, लोकपाल तथा राज्यों में लोकायुक्त के दायरे में हों, इसी क्रम में, जज भी लोकपाल तथा लोकायुक्त के दायरे में होने चाहिए | 
  10. किसी  राजनेता पर भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर उसे राजनीति से पूर्णतः अलग कर दिया जाये | 
  11. भ्रष्टाचारी की संपत्ति राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दी जाये |
  12. देश  के सम्मान तथा सुरक्षा से खेलने वालों को फाँसी की सजा दी जाये | 
  13. विदेशों में धन जमा करने की अनुमति देने के पूर्व सभी संदेह दूर कर लिए जाएँ तथा ऐसे खातों का निश्चित समयांतराल में पुनः परिक्षण किया जाये | 
  14. गरीबों का धन लूटने वालों को आजीवन कारावास दिया जाये |
  15. भ्रष्टाचार का रहस्योद्घाटन करने वाले आम नागरिकों तथा मीडिया को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाये | 
  16. राष्ट्रपति, सभी जज, प्रधानमन्त्री, सभी कैबिनेट मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री तथा कैबिनेट मंत्री अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करें तथा व्यर्थ के दिखावे से दूर रहें | 
  17. मीडिया धन के अपव्यय करने वाली पार्टियों को महत्त्व ना दे क्योंकि अभी भारत भूखा है, वह धन का अपव्यय देखकर खुश नहीं हो सकता है, यह मीडिया का अपना प्रण होना चाहिए | 
' भ ' से ' भारत ' और ' भ ' से ' भ्रष्टाचार ' एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं | भ्रष्टाचार के घुन को केवल उपवास और आन्दोलनों से ही समाप्त नहीं किया जा सकेगा अपितु इसके लिए आवश्यक होगा एक सबल ईमानदार राष्ट्रीय चरित्र जो प्रत्येक नागरिक का आभूषण हो | यह कदापि असंभव नहीं है| स्वदेश की रक्षा प्रत्येक नागरिक का धर्म है और आज हमारा सबसे बड़ा दुश्मन भ्रष्टाचार है जिसके खिलाफ हमें एकजुट होकर लड़ना है| व्हिसल ब्लोअर बनिए, बनाइये और सुख की नींद तब तक ना लें जबतक हमारा देश भ्रष्टाचार से मुक्त ना हो जाये|

यात्रा नहीं जनाब, काम कीजिये




८ सितम्बर को लालकृष्ण आडवाणी जैसे संसद के माध्यम से समाचारों में छाने को बेताब थे, उन्होंने लोकसभा में लगातार दो घोषणाएं की. पहली घोषणा थी कि वे संसद में हुए नोट कांड की जिम्मेदारी लेना चाहते हैं और इस नाते वो खुद भी जेल जाना चाहेंगे जैसा की उनके दो विधायकों को जेल भेजा गया है. और दूसरी, वो पुनः रथ यात्रा प्रारंभ करेंगे. ८२ वर्षीय नेता क्यों कह रहा है कि मुझे जेल भेजो, क्या ये अन्ना की नक़ल है, नहीं. इमर्जन्सी के दौर में पहले भी श्री लालकृष्ण आडवाणी जेल जा चुके है पर इस बार उनके लाख जोर-जोर से चिल्लाने पर भी देश से कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली और लोग समझ गए कि यह सब खेल है राजनीति का.  
लालकृष्ण आडवाणी आज भी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं ना कि कोई नैतिक जिम्मेदारी लेने के इच्छुक है. देखिये न, ऐसी कोई जिम्मेदारी हमारे केन्द्रीय मंत्री या प्रधानमंत्री नहीं लेते हैं और न ही आडवाणी ने अपने गृहमंत्री के कार्यकाल में ऐसा कोई उदहारण प्रस्तुत किया था जबकि इनके कार्यकाल में बेहद शर्मिंदा करने वाला ताबूत काण्ड हुआ था फिर भी ये तनिक लज्जित नहीं हुए थे. बिलकुल पी. चिदंबरम की ही तरह विशेष चाल और ढाल का प्रदर्शन करते हुए बात करते थे, तो फिर आज रिश्वत जैसे मसलों पर इतना गुस्सा क्यों?
उनकी दूसरी घोषणा थी की वो रथयात्रा करेंगे. क्यों करेंगे? इसकी अब किसे जरुरत है? देश हाई टेक हो गया है अतः अब युवाओं से जुड़ने के लिए रथ यात्रा की जरुरत ही नहीं है केवल यात्रा डोट कॉम से ही काम चलाया जा सकता है और भारत की ग्रामीण जनता एक ८२ वर्षीय नेता से क्या उम्मीद करे? ये एक भी ऐसा नेता बीजेपी से नहीं उपजा पाए हैं जो कि अपरिपक्व राहुल गाँधी को दरकिनार कर दे. जबकि अन्ना टीम के अरविन्द केजरीवाल ने मात्र ६ माह में ही लाखों युवाओं और बुजुर्गों को भी अपना मुरीद बना लिया है, ये काम बीजेपी अवसरों कि भरमार होने पर भी नहीं कर पाई है. अब ये नया कुछ कर भी नहीं पाएंगे क्योंकि अन्ना के तैयार किये माहौल का कांग्रेस इन्हें फायदा उठाने नहीं देगी. 
बात साफ़ है, अब काम ही बोलेगा, माइक और शब्द नहीं. ६० वर्षों बाद ही सही पर अब देश चुपचाप कुछ भी नहीं सहेगा. अब सबको जवाब देना होगा संसद में. काम करके दिखाना होगा अपने संसदीय क्षेत्र में और खाना खाना होगा तिहाड़ में यदि अब भी नहीं सुधारे तो. बात एकदम सीधी और सपाट है, जो काम करेगा वही मेवा खायेगा. तो मेवा खाना है तो अच्छे नेता तैयार करें जो आपको अगले चुनावों में निर्णायक बढ़त दिला सकें. 

12.9.11

बेखबर रहेंगे कब तक?



भारत में लगातार हो रहे हमले हमारी शासन व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं. फिर वही धमाके, देश के दिल दिल्ली में. परन्तु इस बार कुछ अलग दिखा जो पहले नहीं दिखाई दिया था और वह है अन्ना का प्रभाव. गृहमंत्री का फ़ौरन घटना स्थल जाना और प्रधानमंत्री का बेबस बयान कम से कम इतना तो बदलाव आया की जेड शेनी की सुरक्षा में बैठना ही पर्याप्त नहीं है परन्तु देश में आई प्राकृतिक और आतंकवादी आपदाएं हमें भी कुछ कह रही हैं. 

नेताओं का दोष तो है परन्तु एक नागरिक के नाते हमारी भी कुछ जिम्मेदारियां बनती हैं अपने देश को आतंकवाद और आपदाओं से बचाने की अतः  हमें  अपनी इन जिम्मेदारियों  को निभाने के लिए ये कदम उठा सकते हैं.

  1. आपदाओं और आतंकवादी घटनाओं से निपटने के लिए एक कार्यक्रम  तैयार  करें जो स्कूली बच्चों और युवाओं को मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत बनाये ताकि वो ऐसे हालात से स्वयं निपटने में सक्षम बन सकें.
  2. गली-मोहल्लों में ऐसे समूहों का निर्माण करें जो व्हिसल ब्लोवर का काम करें ताकि देश में एकता और मजबूत हो.
  3. अवांछित तत्वों पर ये जागरूक समूह कड़ी दृष्टी रखें और तुरंत इनकी जानकारी पुलिस को दें.
  4. होटल मालिक और गृह स्वामी क़ानून का पालन करें और बिना पहचान- पत्र  के किसी को भी घर या कमरा किराये पर ना दें.
  5. विस्फोटकों की खरीद -फरोख्त पर नजर रखें.
  6. देश में धार्मिक उन्माद न फ़ैलाने दें.
  7. पुलिस और अपराध रोकने हेतु बनाई गई प्रशासनिक मशीनरी में बैठे सुस्त और लापरवाह अधिकारीयों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये ताकि बाहरी दुश्मन हमारी कमजोरियों का फायदा ना उठा सकें.
  8. सरकार को मजबूर करें कि वह भ्रष्ट लोगों से सख्ती से निपटे ताकि देश में शांति और व्यवस्था बढे और असंतोष न पनपे.

6.9.11

मायावती की माया


अन्ना हजारे को कोसने वाली मायावती अपने मायाजाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फंस चुकी हैं. उनके नाम से बने गार्डन पहले ही उनकी मंशा जाहित कर रहे थे और अब विकिलीक्स  का  दावा  रही  सही  कसर  निकाल  रहा  है , ध्यातव्य  है कि यूपी  में चुनाव  सर  पर  हैं , ऐसे  में  बहन मायावती  को  यह  खुलासा  सत्ताच्युत  कर  सकता  है. अन्ना  हजारे  के  आन्दोलन  ने  यह साबित  कर दिया है कि ईश्वर जाति -धर्म  में नहीं  बल्कि  इंसानियत  में बसते  हैं जिसे  समझने  की  समझ  हम भारतीयों में है.