16.6.17

फिर वही सवाल ?

आपने कोचिंग क्यों खोली आप तो ऑफिसर नहीं हो...
हमेशा की तरह वही सवाल .. आपने कोचिंग क्यों खोली आप तो ऑफिसर नहीं हो....  मैं बोर हो चुकी हूं बता बता कर कि मेरे बच्चे ऑफिसर है और ऐज़ अ टीचर... यही मेरी जॉब है ... पर वह दो औरतें कहां मानने वाली थीं...  मुझे लगा वह बहुत ज्यादा फ्रस्टेटेड थीं और इस बात से काफी परेशान थीं कि पुरुष उनसे ज्यादा मुझ पर ध्यान दे रहे थे। वह हर कोशिश कर रही थी मुझे नीचा दिखाने की.... पक पक पक पक पक पक ...दिमाग खराब हो गया था मेरा.. बस फिर मैंने मौन व्रत ले लिया और टीटी के आने का इंतजार करने लगी.... 😑😑😑

टीटी के आते ही मैंने कहा ..... प्लीज मेरी जगह चेंज कर दीजिए .... ट्रेन में बैठी दोनों सहयात्रियों ने मुझे बड़े गुस्से से घूर कर देखा और TT ने उन्हें गुस्से में देखा ...... 1 सेकंड को लगा कि मैंने गलती की ... मुझे धैर्य दिखाना था... पर जल्दी ही अपनी बीमार बेटी को लेकर मैं दूसरी जगह बैठने चली गई । यहां अच्छे लोगों का साथ मिला और मेरी बेटी भी खुश होकर बात करने लगी 🐤🐤🐤 वहाँ कॉलेज के लड़के लड़कियां थे आपस में हंसी-खुशी बात कर रहे थे और मुझसे भी टिप्स लिए गए ..पीएससी क्लियर करने के .. that's so nice ..😊😊😊 👍👍👍

कहने का मतलब यह है कि हर समय बेवकूफों को झेलना कोई जरूरी नहीं है । आप अपने बैठने की जगह भी बदल सकते है क्योंकि कुछ लोग तो सुधारने से रहे...  हम क्यों अपना समय खराब करें उनपर... 😏

 कोचिंग खोलने के बाद से ऐसी घटनाएं बहुत बढ़ गई हैं मेरे साथ जिसमें औरतें मुझे बहुत बुरी तरह टारगेट करती हैं और उनके मूर्ख मित्र भी चले आते हैं मुझे नीचा दिखाने ।।।।। क्या कर सकते हैं ...कुछ नहीं कर सकते..   उस वक्त को बस बीत जाने देते हैं बस। परंतु कालांतर में देखने में आया कि वह औरतें भस्मासुर साबित हुईं और बुरी तरह बेइज्जत करके अपने ही ग्रुप से निकाल दी गयीं ।  हाँलाकि कुछ बड़ी चालाक होती हैं...  लगता है उनका बड़ा इंतजाम किया जाएगा... पर यह तो मानना पड़ेगा 'जैसी करनी वैसी भरनी' । आज नहीं तो कल, अपनी जलन अपने ही लिए भारी पड़ेगी क्योंकि अच्छे लोगों का साथ खुद ईश्वर देते हैं।

😇😇😇

हमारा पर्यावरण

घर की हौद में कमल के फूलों के बीच सुंदर सुंदर चिड़ियाँ नहातीं, फड़फड़ातीं और सावधानी से चलती हुईं पानी के कीड़े खातीं बहुत प्यारी लगती हैं। मन करता है ये यूं ही संध्याजी की तरह पंख होते तो उड़ आती रे जैसी भंगिमाएँ बनातीं रहें और हम छुपकर चुपचाप इन्हें देखते रहें। मन करता है फोटो लूँ पर हमारी कोई भी हरकत इनके सामान्य जीवन में अड़ंगा न बने सोचकर ....

इधर धूप ऐसे तेज़ होती जा रही है जैसे बच्चों ने होड़ लगा ली हो कि किसका झूला सबसे ऊपर जाएगा। कभी रायपुर, कभी चाँपा, कभी बिलासपुर ... गजब प्रेस्टीज इश्यू बन गया है जनसामान्य में कि हमारा शहर सबसे गरम था कल... पेपर में आया है .. तुम्हारा 42° होगा .. हमारा 42.5° है .. और रूको थोड़ा 45° होना भी कोई बड़ी बात नहीं है.. पर इतना बोलते वक्त रूतबा 'दुखता' में बदल जाता है।

सोचती हूँ हमारी क्यूट गौरैया का क्या होगा अगर उसके आसपास पानी न हुआ और हुआ भी तो अगर उस स्त्रोत के पास अहीर याने शिकारी हुआ तो ? हमारी अरपा नदी इनकी समस्या का हल हो सकती है .. वहाँ चिड़ियों को आसरा मिल सकता है प्राकृतिक शरणस्थली के रूप में। ओह्ह.. याद आया ... हमें पहले तो अरपाजी को बचाना होगा पर कैसे? हम तो अपने घरों में पेड़ उगाते हैं अरपा तट पर नहीं फिर पूजा भी घर में करते हैं अरपाजी की नहीं। यहाँ तक की हमने कभी अरपा को अरपाजी तक नहीं कहा.. मतलब... हम बिलासपुर की प्राण शक्ति से ही कभी नहीं जुड़े तो अब ... सहिए 46.5° ताफमान हर साल।

हमारे अहम् ने हमें हमारी संस्कृति से विमुख किया है। अहम् को स्वार्थ भी कह सकते हैं। न नदियाँ बचीं न गायें बचाइए.. न चिड़ियाँ बचेंगी न पेड़ ... और सच - सच बताऊँ ... किसी बम के मदर और फादर की जरूरत नहीं है .. हम खुदही धीमी आत्महत्या के चरम को .....

तो क्या करें.. भई... वेदों को गरियाना ही पढ़े लिखे होने का सबूत है.. समाज सुधारक होने का सबूत है .. सबने किया ये तो... । मेरी दादी कहतीं थीं कि तेरी सहेली कुएँ में कूदी तो तू भी कूदेगी क्या ? भई जब आप रिज़ल्ट देख रहे हो सामने तब भी आँख बंद किए रहोगे क्या ?  अब तो नवाचार अपनाइए ... कब तक सौ साल पुराने ट्रेंड पर चलेंगे..।  आज का ट्रैंड 'वेदों की ओर लौटो' ही है मानो या न मानो ..
एक बात और, स्नेह और देखभाल भी गंगाजल की तरह तरल और पवित्र हैं। इनका प्रयोग भी भरी गर्मी में ज़रूर करिएगा ...  सूर्यदेव का प्रकोप कम मालूम पड़ेगा  ...

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Queen Kangana

एक वक्त था जब मुझे कंगना रानौत सख्त नापसंद थी..
पर हुआ यह कि एक दिन youtube पर मैंने ट्रेलर देखा""' मैं अकेली घूम रही हूं...  मेरा हाथ पकड़ने वाला कोई नहीं.... मैं अकेली एफिल टावर देख रही हूं मेरे साथ फोटो खींचने वाला कोई नहीं .... मेरी जिंदगी तो झंड हो गई है... और उसके बाद पीछे गाना बजता है... तूने जो पिलाई तो हंगामा हो गया ..हां हंगामा हो गया.... "

तनु वेड्स मनु मुझे कुछ खास अच्छी नहीं लगी थी हीरो पसंद है पर हीरोइन कुछ खास नहीं...

पर क्वीन का ट्रेलर देखने के बाद मैं खुद को रोक नहीं पाई और फिल्म देखने चली गई । एक ऐसी फिल्म जिसके हीरो हीरोइन से मुझे कोई मतलब नहीं था। मैं बस यह देखना चाहती थी कि हिरोईन अकेले हनीमून पर क्यों गई थी ?

 फिल्म शुरू हो गई.. एक साधारण लड़का स्क्रीन पर आया और इतना बुरा व्यवहार अपनी होने वाली पत्नी के साथ किया कि हॉल में बैठी हुई लड़कियां क्या लड़के तक सन्न रह गए। हम सर खुजलाने लगे कि फिल्म तो खत्म हो गई अब यह दिखाएगा क्या ?

इसके बाद फिल्म शुरू होती है पेरिस में ... जहां कंगना को बहुत अच्छे दोस्त मिलते हैं... लड़के हो या लड़कियां ... देश कोई भी हो... रंग कोई भी हो.. होते सब इंसान हैं। एक अजीब सी जर्नी कंगना की शुरू होती है जहां अनजान लोग उस का हौसला बन जाते हैं और उसे पूरी तरह रियल पर्सन बना देते हैं।

फिल्म में कंगना का नाम रानी था जो शुरू में अजीब लगता है..  परंतु फिल्म खत्म होने के बाद .. आज तक..  मुझे कंगना Queen ही लगी हैं। उसके बाद आई तनु वेड्स मनु पार्ट 2 ... अच्छी फिल्म थी हीरो तो पसंद है ही .. पर इस बार हीरोइन भी अच्छी लगी even ज्यादा अच्छी लगीं।

उत्तराखंड के लोग दिल के सरल होते ऐसा मेरा इलाहाबाद के हॉस्टल का अनुभव है । कंगना को भी छल कपट पूर्ण व्यवहार करते नहीं देखा। हमेशा यही पढ़ा कि उनका मजाक उड़ाया जाता है , उनकी बहन रंगोली पर एसिड अटैक हुआ और उसके बाद ताजा प्रकरण ऋतिक विवाद हो गया।

कंगना हमेशा अपने बोल्ड अवतार में सामने आती है इन सब विवादों को अपने क्लियर कट अंदाज में उन्होंने निपटाया जिसकी वजह से वे लड़कियों की रोल मॉडल बन गई।

इस बीच अचानक हालाकि मैं पढ़ती नहीं हूं परंतु भास्कर में है कोई नाम याद नहीं आ रहा... और इंफेक्ट ...चौरसिया जी.. हां.. मैं उनका नाम याद करना भी नहीं चाहती थी.... चलिए अब याद आ गया ...उन्होंने लिखा के रितिक कितने महान परिवार के हैं और कंगना की औकात ही क्या है ...कभी इसके साथ रही कभी उसके साथ रही... स्टेशन में सोई... मुझे बहुत बुरा लगा। उन्होंने ऋतिक के बचाव के लिए कंगना की इज्जत की वह धज्जियाँ उडा़ईं ..   कि पूछिए नहीं । एक कलेक्टर की पोती जो अपने दम पर अकेले खड़ी होती है बिना किसी पुरुष का नाम लिए तो उसको कोई कुछ भी बोल सकता है ... और जब वह ऐसा बोल रहा होता है यह भूल जाता है कि इज्ज़त बोलने वाले की उतरी। कंगना तो हमारे लिए क्वीन है और रहेंगी।

कल अचानक फिर नजर पड़ गई पेपर पर जिसमे चौरसियाजी ने नरगिस की माताजी के संघर्ष को बड़े अच्छे से बताया । क्यों... डरते हो संजय दत्त से... कंगना के बारे मे लिखते समय नहीं  ध्यान आया  यह कंगना का संघर्ष था क्योंकि आपको कंगना का डर नहीं है। यही सोच है भारतीय पुरुषों की ...ऋतिक हों.. चौरसिया हो ...असफल बेटे के बाप शेखर सुमन हो .. सफल करण जोहर .. सब चिढ़े हुए अटैकिंग लोग.

कंगन कभी बदलेंगीं भी नहीं..  क्यों कि उन्होंने यह छोटा सा मुकाम अपने दम पर हासिल किया है। कंगना आप हमारे दिल में हो इज्जत से हो और हमेशा रहोगी।

शेखर सुमनजी आसमान पर मत थूकिए और अपने बेटे की असफलता अब पचाइए... क्यों अपनी हँसी उड़वा रहे हैं...

My favourite Shridevi

मेरी एक और फेवरेट फिल्म है। वो सबकी फेवरेट फिल्म है पर वो फिल्म फ्लॉप भी हुई और विवादित भी रही .....'लम्हें' ..
ये श्रीदेवी के करियर की ढलान की शुरुआत थी। इसके बाद और कई फिल्में आईं उनकी पर सब बकवास... लाडला छोड़कर। समय बदल रहा था.. दिवाना की श्रीदेवी लुक अलाइक दिव्या भारती सात समुंदर पार तक सबको लुभा रहीं थीं। चुलबुली और परफेक्ट श्री किसी भी फ्रेम में फिट नहीं बैठ रही थीं। हालत ये थी कि मुझे और कोई भाए न .. उनकी आँखें ... उनका डांस ... उनकी नटखट शैतानियाँ ... पर खुद लगे कि अब इनको सन्यास ले लेना चाहिए।

अब इस बुरे दौर से गुजर रही मुझ मायूस फैन को सहारा मिला स्वीsssssssट क्यूट जूही चावला की पनाह में। जैसे ही सुंदर सी चावला जादू तेरी नजर पर दौड़तीं जातीं हम निकल पड़ते सेम ड्रेस खरीदने। चाहत इतनी जोर मारी कि घूंघट की आड़ से गाना देखने के बाद प्यार राहे इज़हार तक पहुँच गया और उनका एक कंधे दिखाता फुल साइज़ पोस्टर दिवार पे चिपका मारा। ये बात आम ही है .... कि इधर इज़हारे प्यार हुआ ..  उधर सारी बुआओं ने वो कोसा जूही को कि पूछिए मत।

इनके बाद आईं काजोल, करिश्मा, उर्मिला .. सब एक से बढ़कर एक पर ... सब 'उनसे' पानी कम ही थीं।

फिर न जाने कहाँ से आईं हमारी चाँदनी इंगलिश विंगलिश में। उफ्फ़.... वॉट अ ट्रीट इट वॉज़ ... 👌👌👌

तत्पश्चात हम सदमे से बाहर आए......... और गुनगुनाए....
'तू मेरी चाँदनी .....❤❤❤

- पक्की चमची ऑफ श्रीदेवी ☺

हमारी इरोम

डियर इरोम,

मुझे पता है आप इसे नहीं पढ़ेंगी पर अपने दिल की बात सबके सामने लिखूँगी ज़रूर। आपके अनशन ने मेरे मन में एक आपके प्रति एक दृढ़ व्यक्ति की छाप छोड़ी है।

डियर, आपका अनशन करना मुझे आधा गलत लगा क्योंकि पूर्वोत्तर के हालात मजबूर करते हैं कि वहाँ भारतीय सेना तैनात हो और आधा  सही लगा क्योंकि यह अनशन सेना की ज्यादतियों के खिलाफ था।

आपका मन निश्छल है जो तीन-पाँच समझने और करने की इजाज़त आपको नहीं देता है। अन्य दलों ने जो तरीके अपनाए वही तरीका है आज सफल जीवन जीने का। धनबल, बाहुबल, बरगलाना सब क्योंकि कहते हैं न जो जीता वो सिकंदर जो हारा वो बंदर। तो जंग में सब जायज़ है हमेशा से। आपको यह जंग नहीं लगी दैट्स सो नाइस ऑफ यू।

इरोम .. बाहरी दुनिया में कदम रखोगी तो इस सच्चाई का सामना करना ही होगा। आप तो बहुत बहादुर हो आपको घरवालों का सपोर्ट नहीं था फिर भी आपने अपने इरादे कमजोर न पड़ने दिए। अब आप आराम से अपनी ज़िंदगी बिताइए जिसकी हक़दार आप हैं.. डेफिनेटली हैं।

आप पर मुझे गर्व है कि हमारे देश में भी कोई इतना प्योर हार्ट है। अब तथाकथित योग्य लोगों को आप उनका काम करने दो और आप चैन की बंसरी बजाओ। आप फिर तैयार हों राजनीति में आने के लिए तो फिर आ जाइएगा और तैयारी के साथ ... 😊

लव यू डियर 👍
टेक केयर 😊
#IromSharmilaChanu, #IronLady