जानिए

नेत्रदान करें




भारत में एक अरब लोग हैं . 
जन्म प्रतिदिन - ८६८५३ 
मृत्यु प्रतिदिन - ६२३८९ 
कुल नेत्रहीन - १,५०,००,००० 

यदि एक वर्ष तक, मृत्योपरांत लोग अपनी आँख दान करते हैं तो मात्र एक वर्ष में भारत में कोई भी नेत्रहीन व्यक्ति नहीं बचेगा. 

नेत्रदान से जुड़े मिथक 

१ . मेरा धर्म नेत्रदान की आज्ञा नहीं देता है .
     दुनिया के सभी धर्म परोपकार को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं . यदि आप चाहें तो अपने धर्मगुरु या आध्यात्मिक गुरु से इस विषय में बात कर सकते हैं . 

२. नेत्रदान करने वाले अगले जन्म में नेत्रहीन पैदा होते हैं . 
    मृत्यु के पश्चात शरीर किसी न किसी रूप में नष्ट किया ही जाता है इसलिए नेत्रदान करने में संकोच न करें. प्राचीन काल से ही भारत में अंग प्रत्यारोपण की शल्य क्रिया की जाती रही है. 

३. नेत्रदान करने के लिए पैसे देने होंगे.
    मृत्यु के पश्चात किसी रजिस्टर्ड डॉक्टर से आप मृतक की आँखें छः घंटे में निकलवा लें. यह कार्य पूर्णतः शुल्क रहित है. 

४. नेत्रदान स्वस्थ व्यक्ति ही कर सकता है. 
    दूरदृष्टि दोष , निकट दृष्टि दोष और मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं. 

५. अधिक उम्र के लोग नेत्रदान नहीं कर सकते हैं .
    किसी भी उम्र के व्यक्ति नेत्रदान कर सकते हैं. 

६. पूरी आँख का प्रत्यारोपण किया जाता है. 
    आँखों की कोर्निया और सफ़ेद भाग का ही प्रत्यारोपण किया जाता है. 

किन परिस्तिथियों में नेत्रदान नहीं किया जा सकता है -
एड्स, हेपेटाईटीस बी व सी , रेबीज़ , सेप्तिसिमिया , अक्युट लुकेमिया , टिटनस, कोलरा , मस्तिष्क ज्वर और इन्सेफलितिस के रोगी नेत्रदान नहीं कर सकते हैं. 



नेत्र बैंक से संपर्क कैसे करें -
 १९१९ नंबर विशेष रूप से नेत्र  बैंक के लिए निर्धारित किया गया है. ज्यादातर देशों में यही नंबर है. 

इन बातों का ध्यान रखें - 

१. नेत्रदान मृत्यु के छः घंटे के भीतर किया जाना चाहिए.
२. नेत्र संकलन घर से ही कर लिया जाता है भले ही दिन हो या रात. 
३. नेत्रों के बचाव हेतु बर्फ में डूबी रूई को आँखों के ऊपर रख देना चाहिए . 
४. पंखा न चलायें. 
५. मृत व्यक्ति का सर तकिया लगाकर ऊंचा कर दें.
६. यदि संभव हो तो अन्तिबायोतिक आई ड्रॉप थोड़ी थोड़ी देर में लगाते रहें ताकि संक्रमण न हो. 
७. डॉक्टर द्वारा दिया गया मृत्यु प्रमाण-पत्र साथ में रखें.
८. नेत्रदान करते समय दो साक्षी आवश्यक हैं. 

नेत्रदान का संकल्प लेने वाली प्रमुख हस्तियाँ - 

 ऐश्वर्या राय , अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया , उस्ताद जाकिर हुसैन, कैप्टन लक्ष्मी सहगल 

मृत्यु कहाँ और कब होगी यह अनिश्चित है. मृत्यु के पश्चात नेत्रदान छः घंटे के अन्दर किया जाना आवश्यक है.  
कृपया दहन को जाने वाले मृत शरीर का मोह न करते हुए नेत्र दान के संकल्प का सम्मान करें, आप सभी से अनुरोध है. 

धन्यवाद ! 

आप नेत्रदान के इच्छुक हैं तो इस पोस्ट को पसंद करें और यदि आप नेत्रदान संकल्प पत्र भर चुके हैं तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से साझा करें.  ताकि नेत्रहीनता का दुःख कोई न झेले और दुनिया अपनी आँखों से देख सके. 


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अपने कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं को ताकि उनका समय रहते लाभ उठा सकें। 


राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग 

बच्चों के अधिकार से सम्बंधित निम्नलिखित मुद्दे हैं -

१. संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार -
अ. अनुच्छेद २३ (१) - मानव व्यापार, भिक्षावृत्ति और बंधुआ मजदूरी संविधान के तहत दंडनीय अपराध है।  
ब. अनुच्छेद ३९ (फ) - बच्चों को एक स्वतन्त्र  तथा गरिमामय वातावरण में अवसर तथा सुविधाएँ दी जाएँगी और इस प्रकार बचपन और युवावस्था को नैतिक एवं आर्थिक परित्याग से सुरक्षित किया जायेगा।
स. अनुच्छेद ४७ - राज्य व्यक्ति के पोषाहार स्तर में प्राथमिक  कर्त्तव्य के रूप में मानकअनुरूप  निरंतर  सुधार करेगा । विशेष तौर पर, औषधीय प्रयोग में लाये जाने वाले द्रव्यों को छोड़कर उन द्रव्यों को प्रतिबंधित करेगा जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
२. शालाओं में बाल हित संरक्षण 
३. बाल स्वास्थ्य एवं पोषण
४. कन्या भ्रूण हत्या 
५. परिजन रहित बच्चों का संरक्षण 
६. रेलवे प्लेटफार्म में रहने वाले बच्चों के हित का संरक्षण
७. बच्चों का टी.वी. में तथा रियल्टी शो में भाग लेना
८. बाल अधिकार एवं पंचायत
९. बाल यौन शोषण 
१०. बाल मजदूरी
११. बंधुआ मजदूरी
१२. बाल विवाह 
१३. जेलों में बंद माता-पिता के बच्चों की परवरिश आदि ।

NCPCR सिविल कोर्ट की भांति कार्य करता है तथा स्वप्रेरणा से भी मामले की जांच कर सकता है । 
NCPCR से सम्बंधित लिंक हैं -




राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग 

मानवाधिकारों का संरक्षण अधिनियम, १९९३

मानव अधिकार से तात्पर्य  है -
व्यक्ति के वे अधिकार जो उसके जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से सम्बंधित हैं। जिनकी संविधान के तहत गारंटी है एवं जो भारतीय  न्यायालयों द्वारा प्रवर्तित और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्वीकृत हैं। जिनमे   व्यक्ति के नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार को संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेम्बली द्वारा १६ दिसम्बर, १९६६ को अपनाया गया है ।

आयोग द्वारा किन मुद्दों से संबंधित शिकायतें ग्रहण की जाती हैं ?

आयोग के गठन के उपरांत से निम्न मुद्दों से संबंधित शिकायतें ग्रहण की गई हैं -
१. पुलिस प्रशासन से संबंधित मुद्दे जैसे :
अ- कार्यवाही करने में विफलता
ब- अवैध हिरासत
स- झूठे निहितार्थ
द- हिरासत में हिंसा
इ- गैरकानूनी गिरफ़्तारी
फ- अन्य पुलिस ज्यादतियां 
क- हिरासत में मौतें
ख- मुठभेड़ में हुई मौतें
ग- कैदियों का उत्पीड़न तथा जेल की परिस्तिथियाँ
२. अनुसूचित जाति एवं  अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार
३. बंधुआ मजदूरी एवं बालश्रम
४. बाल विवाह 
५. सांप्रदायिक हिंसा
६. दहेज मृत्यु एवं उसके प्रयास, दहेज की मांग
७. अपहरण, बलात्कार, हत्या 
८. महिलाओं का शोषण, यौन उत्पीड़न और अपमान 
९. अन्य शिकायतें जिनका वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है, को भी आयोग द्वारा स्वीकार गया है। 

आयोग द्वारा निम्न प्रकृति की शिकायतों को ग्रहण नहीं किया जाता है  - 

१. घटना घटने के एक वर्ष बाद की गई शिकायतें,
२. न्यायलय में विचाराधीन मामले,
३. तुच्छ प्रकृति की शिकायतें,
४. ऐसी शिकायतें जिनमे शिकायतकर्ता का नाम अस्पष्ट, छद्म या अनाम हो,
५. जिनका सम्बन्ध सेवाओं से है । 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वेबसाईट -
http://nhrc.nic.in/
ऑनलाईन शिकायत दर्ज करने हेतु वेबसाईट - http://164.100.51.57/HRComplaint/pub/NewHRComplaint.aspx


राष्ट्रीय महिला आयोग



राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाईट -
ओनलाईन शिकायत दर्ज कराने हेतु वेबसाईट - 



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