24.8.11

Karvan

कारवां जुड़ता गया 
राह में बढ़ते-बढ़ते

छोड़ चले थे जिन मुकामों को 
आज उन्हीं की तलाश है 

जैसे रास्ता कोई गोल बना गया
मिलते हैं तो लगता है "तुम?"

नहीं मिलते तो न पता चलता 
दुनिया 'उसकी' , राह 'उसकी' 

जिसे मैं समझी थी अपना 
वह मंजिल भी 'उसकी'

हंसती हूँ, मैं यहाँ क्यों? 
बचपन का खेल याद आ गया 

गोल-गोल रानी , इत्ता-इत्ता पानी
बोल मेरी मछली कित्ता पानी

खुश हूँ, गोल-गोल-गोल.....
इत्ता पानी..... तैरना जानती हूँ अब

15.8.11

जन लोकपाल बिल के समर्थन में एक आम भारतीय

प्रति,
श्री मनीष तिवारी,
प्रवक्ता, कांग्रेस दल 
भारत 

आदरणीय मनीषजी,
मैं ( संज्ञा अग्रवाल ) भारत की एक आम नागरिक हूँ जो कि श्री अन्ना हजारे जी के आन्दोलन के समर्थन में आपको यह पत्र लिख रही हूँ | 
मनीषजी, मैं बचपन से ही कांग्रेस की समर्थक रही हूँ और मुझे इस बात का फक्र भी है , परन्तु इस बार कांग्रेस ने मेरी उम्मीदों और विश्वास को बुरी तरह चोट पहुंचाई है जिसका मुझे अत्यंत खेद है | आप नौकरशाही से डर गए? भ्रष्ट नौकरशाहों और नेताओं को अपनी तरफ करने के लिए आपने देश की जनता को धोखा देने की कोशिश की है जो कि मुझे दुखी कर रही है |

मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि आप सरकारी लोकपाल बिल में आवश्यक सुधार लायें तत्पश्चात इसे लोकसभा में प्रस्तुत करें ताकि एक प्रभावी लोकपाल बिल पारित हो और हमारे देश को भ्रष्टाचार रुपी कैंसर से छुटकारा मिल सके | इस नेक कार्य को कांग्रेस खुद करे यही जनता की इच्छा है | मैं आने वाले समय को भ्रष्टाचार मुक्त देखना चाहती हूँ ताकि मेरी बच्ची अपने सामर्थ्य अनुसार उन्मुक्त आकाश में उड़ान भर सके और इस देश को अपनी सेवाएँ दे सके जो मैं भ्रष्ट लोक सेवा आयोग के निर्णयों की वजह से समय पर नहीं दे पाई | आशा करती हूँ कि आप मेरी और देशवासियों की पीड़ा समझेंगे और तदनुरूप आवश्यक निर्णय लेंगे |  

एक अन्य निवेदन यह है कि आपकी पार्टी ( क्योंकि अब कांग्रेस हमें अपनी पार्टी नहीं लगती है ) श्री अन्ना हजारेजी के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी न करे क्योंकि ऐसा कर आप देश को धोखा नहीं दे पाएंगे अपितु अपनी ही छवि और ख़राब कर लेंगे | 

एक आम भारतीय नागरिक  
संज्ञा अग्रवाल 
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ 

यह मेल श्री मनीष तिवारीजी को भेजी जा चुकी है|

14.8.11

Main bhi Anna

Main Anna kaise ho sakti hun? Mujhme aur Anna me ek basic difference hai, chhota- sa hai jo har khaas aur aam vyakti ke beech me hota hai. Hmm.. to aapko bhi pata hai na wo difference ? Janti hun yah sach ki main Anna nahi hun aur isliye hi maine " MAIN BHI ANNA " campaign abhi tak join nahi ki hai. Bhale hi main unke jitni achchhi naa sahi parantu mujhe apne sapnon par garv hai aur unhe poora karne ka koi na koi rasta main dhundh hi lungi yah janti hun, isliye jabtak main apni badhaon se paar nahi pa jati , is mahan hasti se poore shishtachaar ke saath ek Doori banaa kar rakhungi.




Jaisa ki ham sab jante hain, Annaji me aur mujhme ek basic difference hai, wo jo kahte hain wahi karte hain aur main jo karna chahati hun wah nahi karti. Jaise water harvesting, adopting a girl child, educate poor children, clean the drain of my colony, give sheds to rickshaws to protect rickshaw-walas from rain and sun and, many more.  Annaji ke gaon me pani, bijli, shiksha, naukari to door -door tak nahi tha aur bas thi sharaab. Annaji ne gaon walon ka saath lekar sharab ke thekedaron ko is kaam ko band karne ka pran dilaya aur apne gaon ko hara-bhara aur khushhaal banaya. Jis gaon me chay banane ko bhi doodh nahi hota tha usi Ralegan Siddhi gaon ab parmukh dugdh niryatak kshetra ban gaya hai.




Main problem is, how to take first step? It needs big money to do such things and i don`t have enough money to do things in structured manner. Only one rupee coin cannot help poor and we all know that beggers are very happy in begging, even i offer them work, they refused. Then, how can i help them was a big question for me.




Kuchh 5-6 saal pehle maine ek non-profit sanstha ke baare me jana, wo garibon, bachchon, paryavaran etc. sabhi mamle jinme sahayata ki aavashyakta hoti hai , ko apni buddhi, shram, aur dil ke mel se kar rahe the parantu chunki jaruraten apaar hain isliye fund raising ki ja rahi thi.




Isha Foundation, gaon-gaon jakar swasth jaanchne tatha unko uchit upachar dena, poore tamilnadu me ghatate jalstar ko rokne hetu plantaion karna, garibon ke bachchon ko muft shiksha aur aavagaman ke saadhan dena, gaon me olympics ka aayojan karna taki yuva sharaabkhori chhodkar khelkood me dhyaan lagaye aur sugathit sharir ka prayog dhanarjan me lagaye, sunami pidhiton ke liye aawaas, kapde aur swasthy ki suvidhayen dena jaise na jane kitne lokopkaar ke kary karta hai.




Jo sapne main yahan poore nahi kar paa rahi thi, unhe poora karne ke liye maine Isha Foundation ko aarthik madad dekar poore karne ki koshish ki. Aaj bhi mere paas N.Kavin Raja ka patra rakha hai jisme usne mujhe apna dhanywaad bheja hai kyonki maine uski ek varsh ki padhai ka kharcha diya tha. Us dhanyawaad patra ki jarurat nahi thi mujhe parantu us patra me uski progress report aur uske dwara banai gai drawings bhi thi jo mere dil ko chho gai. Ham jitna apne daan ke baare me baaten karenge utna hi un logon ko aage badhne me madad karenge jo donations dena to chahte hain par kisi hichak se nahi dete ya sangmarmar ke mandir banane me paise barbaad kar dete hain. Un rupayon se main gahne bhi khariid sakti thi jo ki mujhe atipriya hain parantu wo ek bachche ki padhai se jyada moolyavaan nahi hain, mere liye. Maine niyam bana liya ki apni beti ke janmdin par main aisa koi na koi karya avashya karungi.




Main janti hun ki apne dwara diye gaye daan ko uttam purush gupt rakhte hain parantu main aisa nahi kar rahi. maine apne paison ko Bharat ke ujjawal bhavishya me invest kiya hai, mujhe bhrashtachar, aatankvaad, loot se bhay nahi lagta kyonki jahan ek paivaar ki tarah sabhi bachchon ko paalaa jayega wahan aisi ghatnayen sar nahi utha sakengee aisa mera maanana hai. Yahi sochkar, maine apne gupt daan ko sarvajanik kiya hai, kya hua ki ham Anna ya Sadhguru ki tarah kary nahi kar pate, jo ham kar sakte hai, wo to karen. Kahte hain na, Boond-boond se ghada bharta hai. Mujhe nahi chahiye apne bachche ka aangan, poora jag mera ghar hai. Mere liye saflata ka matalab hai khulkar jeena, naki Maatra sampatti jodkar rakhna joki sirf aur sirf apne liye jodi jati hai. Aisa samaaj jo sirf apne liye kamata-khaata ho, nirapad jeevan nahi jee sakta hai.




Aaj fir aisa avasar mila hai ki ham samaaj ki bhalaai ke liye kuchh kar saken aur aane wali peedhi se sar uthakar kah saken ki hamne tumhare liye bhrashtachar mukt samaaj banaya hai, taki tumhe wo sab naa jhelna pade jo hamne jhela tha. Udo kitna ooncha ud sakte ho, koi nahi rok sakta hai tumhe aage badhne se, jeene se aur sammanpoorvak muskurane se. hamne kar diye hain achchhai ke dushmanon ke daant khatte. Hamare to rengane par bhi paabandi thi, tum daudo. Hamari bebas muskaan par bhi paabandi thi, tum khulkar hanso kyonki ise hi kahte hain, Jeevan.

12.8.11

यहाँ इंसान की कोई क़द्र नहीं

कल समाचारों में ब्रिटेन में हो रहे दंगो  का समाचार देखा, साफ़  नजर  आ  रहा  था  कि  दंगाई  कोई  सभ्य  लोग या आन्दोलनकारी नहीं हैं अपितु , चोर  और  गुंडे  हैं जो  लूट  रहे हैं अपना  ही  देश, कैमरों के सामने | उसके  बाद  ब्रिटेन  के  प्रधानमन्त्री  डेविड केमरोन का  बयान  भी  सुना, उन्होंने  कहा, " ये  लोग  ये  ना  समझें  कि  हम जो चाहे वो कर सकते हैं, कुछ  नहीं  होगा, इन्हें  इस  दंगे  के  परिणाम  भुगतने  होंगे  | ब्रिटेन  में  एक  तबका  बीमार  हो  गया  है  | " ब्रिटेन में हुई पूरी घटना मैं भारत  की जनता और प्रशासन के सन्दर्भ  में  देखती  हूँ  तो  लगता है  कि हम  कितने  गिर  चुके  हैं | इस बात का अहसास और बढ़ जाता है कि क्या जनसंख्या अधिक होने का मतलब यह है कि हमें इसकी क़द्र करने की कोई जरुरत नहीं है ?


कल  पुणे  में  गैस  पाइप  लाइन  के  लिए  जमीन  अधिग्रहण  का  विरोध  कर  रहे  किसानों  के  ऊपर  पुलिस  ने  गोलियां  दाग  दीं  और  तीन  किसानों  की  जान  ले  ली | पुलिस  कहती  है  कि ये  सब  उसने  आत्मरक्षा  के  लिए  किया, कमर  से  ऊपर  गोली  मार  दी, आत्मरक्षा  के  लिए ? खैर, सच कैमरों में कैद है और पुलिस अपने तीन अधिकारीयों को सस्पेंड कर अपना बचाव कर रही है परन्तु इससे उन किसानों की जान वापस नहीं लाई जा सकती है | हमारे  न्यूज़  चैनल  कह  रहे  हैं  कि लन्दन  तो  पढ़ा - लिखा  देश  है, वहां  दंगाई  कैसा  व्यवहार  कर  रहे  हैं, देखिये |  क्या आप  जानते  हैं कि  ब्रिटेन के  आठ  शहरों  में  फ़ैल  चुके  दंगो  को  देखते  हुए  सरकार  ने क्या किया? उन्होंने  कोबरा मीटिंग  की  ताकि  ये निर्णय लिया जा सके कि पुलिस  को  दंगाइयों  पर पानी की  बौछार  करने  और 'प्लास्टिक' की  गोलियां  दागने  का  अधिकार  दिया  जाये  या  नहीं जो  कि ब्रिटेन के  इतिहास  में पहली  बार  होगा | हमारे  हुक्मरान  होते  तो  कहते, दंगो  के पीछे, पकिस्तान का  और  विपक्ष  का  हाथ  है, मारो  सबको, जो  सामने  दिख  जाये | क्या ये व्यवहार शोभा देता है भारत को ? क्यों  नहीं  जनाब, हम  हैं  भी  तो १२१  करोड़, हद  से  ज्यादा, गाजर-मूली  से  भी गए  बीते, मारो | 

भारत  में  आज  जैसे  हालात  हैं, सब  चिंतित  हैं  कि  कहीं  कोई  अनहोनी  ना हो जाये  | बापू  ने  बार-बार  कहा था कि , जबतक  जनता  शांति  और  अहिंसा का मतलब  नहीं समझ जाती, मैं आन्दोलन नहीं करूँगा| आज अन्ना हजारे को भी यही बात ज्यादा दृढ़ता से कहनी चाहिए क्योंकि जैसे हमले लगातार सरकार सिविल सोसायटी के सदस्यों पर कर रही है उसे देखते हुए अंदेशा है कि  कल को देश पैसे से नाचने वाले गुंडों के हवाले न हो जाये | ऐसे में हर देशवासी का फर्ज होगा कि वह आन्दोलन में शरीक होने के साथ ही शरारती तत्वों पर कड़ी नजर रखे ताकि सरकार, धारा १४४ का प्रयोग ना कर  पाए  और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का ऐसा पावन अवसर हमारे हाथ से ना फिसल जाये | आखिर हम १२१  करोड़ दिल-दिमाग और २४२  करोड़ हाथ  हैं | हम चाहे तो क्या नहीं कर सकते ? सरकार भले सत्ता के मद में चूर हो पर हम,  अपनी क़द्र जानते हैं और सरकार को भी यह समझा सकते हैं कि वह हमें अब और नहीं ठग सकती है |   जब स्टोर्स की लूट पर गोलियां चलवाई जा सकती हैं तो पूरे देश कि संचित निधि लूटने वालों के खिलाफ मुहीम क्यों नहीं चलाई जा सकती है ? हमें आवश्यकता नेताओं की है पर,  ये ही लोग हमारे नेता बने ये अनिवार्य नहीं है |



9.8.11

Aandolan ko hai hamari jarurat

कितना अलग नजारा था उस दिन , लोग हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां लेकर, हाथों में तख्तियां .... हम अन्ना के साथ है ... कहते हुए एक छोटा सा  झुण्ड बनाकर खड़े थे | छोटे से शहर बिलासपुर में ऐसा नजारा पहली बार देखा मैंने |  आज फिर वही नजारा, छोटे से समूह में लोगों का नारे लगाते हुए रैली निकालना...' गांधी ' फिल्म की याद आ गई |  जैसे देश को स्वतंत्र कराने के लिए निकले हों ये लोग , मतलब मेरे लोग, जो मुझसे बेहतर हैं | मेरी तरह घर में बैठे बातें नहीं कर रहे हैं, ऐसा ही जुनून सबमे जरुरी है, वैसे लोगों के लिए ये कुछ नया है| आजतक पुरूष राजनीतिक रैलियों और महिलाएं कलश यात्राओं  में निकलती रही हैं, देश के लिए गैर राजनीतिक रूप में बाहर आने में थोडा  समय लगेगा | देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बन रहे माहौल को देखकर तो लगता है कि अब इस देश में कोई भी भ्रष्टाचारी चैन से नहीं सो सकेगा | आमीन !

कौन हो तुम ? (Kaun Ho Tum ?)

कौन हो तुम ? मैंने उससे पूछा
कोई जवाब नहीं 
एक उदास, हारा, सूखा चेहरा
एकटक देखती, कुछ ना कहती

मैंने  खीजते  हुए पूछा, कौन  हो तुम?
कोई जवाब नहीं 
सूखी आँख, विस्मय और निजता 
एकटक देखती, जैसे मुझसे ही बात कर रही हो

ओह्ह्ह !! कौन हो तुम ? मैंने हिम्मत कर फिर पूछा,
'तुम ' , जवाब आया 
सूखी आँख, विस्मय, निजता 
एकटक देखती , पूरे विश्वास के साथ 

'मैं ' ? तभी तुमसे इतना जुड़ाव था 
तभी तुम्हारा बच्चा मुझे अच्छा लगता था
नहीं किया ना मैंने ' उसके ' लिए कुछ
ना तुम रहीं  ना बच्चा 

ना हो फिर ऐसी माँ, ना बच्चा
वादा था, ना होगा फिर ऐसा 
भूली क्यों मैं सबका दुःख  
यही याद दिलाने आई हो ? 

याद है सब, कुछ नहीं भूली
कठिन है  रास्ता .....
धीरे  चलूंगी ,मिलेगा  सबको न्याय  
रखो भरोसा  अपने  आप  पर !   

Kaun ho tum? maine usase poochha
koi jawaab nahin
ek udaas, haara, sookha chaharaa
ektak dekhti, kuchh naa kahti


Maine khijhte hue poochha, kaun ho tum?
koi jawaab nahin
sookhi aankh, vismay aur nijata
ektak dekhti, jaise mujhse hi baat kar rahi ho


Ohhhh!! kaun ho tum? maine himmat kar fir poochha,
' tum ' , jawaab aaya
sookhi aankh, vismay, nijata
ektak dekhti, poore vishwaas ke saath


' Main'? tabhi tumse itana judaav tha
tabhi tumhara bachcha mujhe achchha lagta tha
nahin kiya na maine 'uske' liye kuchh
naa tum rahin naa bachcha


Naa ho fir aisi maa, naa bachcha
vaada tha, na hoga fir aisa
bhooli kyon main sabka dukh
yahi yaad dilaane aai ho?


Yaad hai sab, kuchh nahi bhooli
kathin hai raasta....
dheere chalungi, milega sabko nyaay
rakho bharosa apne aap par ! 


8.8.11

Kya hai jo bandha nahin ?

pehle chalti thi nadiya ki tarah,
akadti thi parvat ki tarah
bananaa chahti thi saagar
adig thi dharti ki tarah


komal thi foolon ki tarah
krodhi thi kaanton ki tarah 
dabi hui chhoti si ghaas ki tarah
ugane ko bekaraar beej ki tarah


bolti jati girti bijli ki tarah
ghoomati baadalon ki tarah
roti barish ki tarah
muskurati os ki boondon ki tarah 


pahle jeevan tha juganu ki tarah
khud hi timtimati aur badhti jati
fir socha kyon na pawan banun
poori prithvi me ghoomu firoon ....


par yah bhi to thoda hai
dharaa ke baahar kahan iska jor   
vistaar ki talaash me bhatakti jati
seemayen dekh thithakti jati


ab pata chala , prakash to maatra ghera hai
charon taraf pasaraa andhera hai
kyon banun, nadi, saagar ya pawan
vishaal, anthin to sirf andhera hai 


is andhere me hi hai jeevan timtimaataa
amaavas ki raat yah saty najar aataa
baaddh hai jaruri nahi chahiye tatbandh
aprimit hi hai asal swaroop jo ab mera hai  





पहले  चलती  थी  नदिया  की तरह,
अकड़ती  थी पर्वत  की तरह
बनना  चाहती  थी सागर
अडिग  थी धरती  की तरह


कोमल  थी फूलों  की  तरह 
क्रोधी  थी  काँटों  की तरह
दबी  हुई  छोटी  सी  घास  की  तरह 
उगने  को  बेकरार  बीज  की तरह 


बोलती  जाती  गिरती  बिजली  की तरह
घूमती  बादलों  की तरह
रोती बारिश  की  तरह
मुस्कुराती  ओस  की बूंदों  की तरह 


पहले  जीवन  था  जुगनू  की तरह
खुद  ही टिमटिमाती  और बढती जाती
फिर  सोचा  क्यों न  पवन बनूँ
पूरी  पृथ्वी  में घूमू  फिरूं  ....


पर  यह भी  तो थोडा  है
धरा  के  बाहर  कहाँ  इसका  जोर    
विस्तार  की तलाश  में भटकती जाती
सीमायें देख ठिठकती  जाती 


अब पता चला, प्रकाश तो मात्र घेरा है
चारों तरफ  पसरा अँधेरा है
क्यों बनूँ नदी, सागर या पवन
विशाल, अंतहीन तो सिर्फ अँधेरा है 


इस अँधेरे में ही है जीवन टिमटिमाता 
अमावस की रात यह सत्य नजर आता
बाढ़ है जरुरी, नहीं चाहिए तटबंध
अपरिमित ही है असल स्वरुप,जो अब मेरा  है 



6.8.11

My Best Friend

काफी दिनों से सोच रही थी कि दोस्तों का त्यौहार आ रहा है उसके लिए क्या विशेष लिखूं , किसके बारे में लिखूं ? पर कुछ ख़ास समझ नहीं आया | आज मेरी इस समस्या का समाधान कुदरत के पास था, इतना प्यारा मौसम, इतनी बारिश, सड़को की तरह लबालब भरी मुस्कराहट ने कहा, कि मेरा बेस्ट फ्रेंड तो ये मौसम है, प्रकृति है जिसने मुझसे कभी कुछ नहीं लिया, हमेशा ही दिया | पर, कहते हैं ना कि एक हाथ दे और, एक हाथ ले | अब प्रकृति वह नियम अपनाने लगी है | वह हमें यह बताने लगी है कि उसके देने की भी एक सीमा है और हमें इस सीमा का आदर करना होगा और जो हमें उपलब्ध है उसका विवेकपूर्ण प्रयोग करना होगा |

मेरी बेस्ट फ्रेंड ने जन्म लेते ही मुझे स्वच्छ श्वास दी ताकि मैं स्वस्थ और जीवित रहूँ | स्वच्छ जल दिया ताकि मैं प्यासी ना रहूँ और बीमार भी ना रहूँ | स्वच्छ खाना दिया ताकि मैं हृष्ट-पुष्ट रहूँ और अच्छी तरह विकास करूँ |  इस तरह इस करुणामयी प्रकृति कि गोद में मैं अनेक खेल खेलती रही | जब थोड़ी बड़ी हुई तो मुझे बगीचा लगाना, सुन्दर क्रम में पौधों को जमाना, फूलों के सुन्दर गुलदस्ते बनाना बहुत अच्छा लगता था | बहुत ख़ुशी होती थी ये दिखाकर कि मैं कितनी अच्छी कलाकार हूँ | मुझे बोनसाई बहुत अच्छे लगते हैं हालाँकि मैंने कभी इस विधा का प्रयोग नहीं किया क्योंकि, मुझे इसकी पद्धति पसंद नहीं है | क्यों हम किसी प्राणी की जड़ काट दें ताकि वो बड़ा ना हो पाए ? हमें किसी को बौना करने का क्या अधिकार है ?  

इस दौरान मुझसे एक गलती हो गई, मैंने प्रकृति को प्यार तो किया, सराहना भी दी परन्तु उसका ख्याल रखना भूल गई | प्रति वर्ष, वर्षा का पानी यूँ ही बर्बाद होता रहा और मैंने पानी के संरक्षण के कोई प्रयास नहीं किये जबकि मैं लगातार अखबारों में इस विषय पर शोध पढ़कर खुद को अप-टू-डेट रखती थी | मुझे पता है कि अशोक के पेड़ दिखने में सुन्दर हैं परन्तु, भारत के उष्ण कटिबंधीय वातावरण को देखते हुए यहाँ घने छायादार वृक्ष लगाने चाहियें | परन्तु, आज तक मैंने अपने मोहल्ले वालों के सामने यह तर्क प्रस्तुत नहीं किया है जिससे बगीचे में लगे अशोक के वृक्षों का स्थान छायादार वृक्ष लेलें ताकि गर्मियों में हमें थोड़ी कम गर्मी सहनी पड़े | मैं बाजार में उपयोग होने वाले प्लास्टिक के थैलों कि जगह रिसायकल किये हुए बैग के प्रयोग की हिमायती हूँ परन्तु ऐसे बैग तैयार करने कि एक भी योजना पर आज तक कोई कार्य प्रारंभ नहीं किया है | 

इन सबके बावजूद, कुछ कार्य मैंने पर्यावरण की रक्षा हेतु किये हैं जिनकी वजह से मैं शर्मिन्दा होने से बच सकती हूँ जैसे, मैं पानी की बचत करती हूँ, प्लास्टिक के बैग का प्रयोग बहुत कम करती हूँ और सड़क पर जाम की स्तिथी में गाडी का इंजन बंद कर देती हूँ | पर इतना काफी नहीं है, लगातार बदलता मौसम, कभी बाढ़ तो कभी सूखा, यह इंगित करते हैं कि कुछ गड़बड़ है | केवल प्रकृति को पूजने और भोगने से काम नहीं चलेगा , हमें प्रकृति के बचाव हेतु ऐसे कदम उठाने होंगे ताकि हम, और आने वाली पीढियां मरते दम तक चैन कि सांस ले सकें | ये कदम साधारण से लेकर अति साधारण तक हो सकते है |

यहाँ कुछ उपाय साझा करना चाहती हूँ जिससे हमारे पर्यावरण को स्वच्छा रखने में आपको मदद मिल सके -
  1. चूहे पकड़ने के लिए जाल/बोरे का प्रयोग करें ना कि चूहे मार दवा का |
  2. खिडकियों में जाली लगायें ताकि कीटनाशक का कम प्रयोग करना पड़े |
  3. कपड़ों को गुनगुने साबुन पानी में भिगाकर वोशिंग मशीन में डालें और गर्म तापमान पर सेट ना करें |
  4. पेड़ों और घास में सुबह जल्दी पानी डालें ताकि ज्यादा पानी उपयोग हो सके वाष्पोत्सर्जन के पहले |
  5. एक साथ कई काम लेकर बाजार जाएँ ताकि बार-बार वाहन का प्रयोग ना करना पड़े |
  6. अपना काम पैदल जाकर करें , शाम को टहलना भी हो जायेगा |
  7. घर गर्म होने के पहले ही शीतलक प्रारंभ कर दें ताकि लू चलने के पहले घर ठंडा हो जाये और पंखे से ही काम चल जाये | 
  8. सब्जी के बचे हुए छिलके और धोवन का पानी फेंकने की बजाये पीछे की क्यारियों में डाल दें |
  9. अपने इलेक्ट्रोनिक सामान को स्टेंड-बाय मोड में ज्यादा देर तक ना छोड़ें | 
  10. जहाँ तक हो सके कच्चा भोजन खाएं , ज्यादा पका भोजन वैसे भी कम पौष्टिक होता है | 
इसके अलावा आप ऐसी संस्थाओं को आर्थिक मदद कर सकते हैं जो पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध होकर कार्य करती हैं | भारत में प्राचीन काल से ही वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पाई जाती है अतः वृक्ष लगाने के लिए किसी विशेष अवसर या जगह की प्रतीक्षा ना करें , जहाँ सूखा दिखे वहां वृक्ष लगाकर कुछ महीने उस वृक्ष का ख्याल रखें तत्पश्चात वह वृक्ष स्वयं ही अपनी देखभाल कर लेगा | हमें जितना हो सके उतना ही उर्जा का संरक्षण करना चाहिए और अपनी बेस्ट दोस्त का ख्याल रखना चाहिए | इट्स कूल | इसकी गोद में जन्मे, इसकी गोद में सो जायेंगे, पूछती है धरती हमसे, हम इसे क्या देकर जायेंगे ? मेरी तरफ से, देखभाल, क्योंकि इस मृदुल पवन ने मेरे उखड़े ह्रदय को सान्तवना दी है, विशाल हिमालय ने ऊँचा संकल्प दिया है, लहराती नदिया ने मुश्किल में भी राह बनाकर चलना सिखाया है और धरती ने सहना सिखाया है, पेड़ों ने 'देना' सिखाया है, पुष्पों ने महकना सिखाया है | क्या-क्या नहीं दिया है मेरी बेस्ट फ्रेंड ने मुझे, अब मुझे भी रिटर्न गिफ्ट देना है , इससे पहले कि मेरी बेस्ट फ्रेंड मुझसे हमेशा के लिए नाराज हो जाये | 


4.8.11

Rang Manch Saj Gaya Hai

इस दिन का पूरे देश को बेसब्री से इंतज़ार था, इधर लोकसभा में लोकपाल बिल पेश हुआ उधर अन्ना और उनकी टीम ने कैमरे के सामने बिल की प्रतियों को जलाकर सांकेतिक रूप से सरकारी लोकपाल बिल के प्रति अपनी असहमति प्रकट की | यह बड़ी विचित्र बात है कि लोकपाल बिल अन्ना हजारे द्वारा ४ अप्रैल को किये गए अनशन की वजह से ही पुनर्जीवित हुआ है और उनकी टीम, सरकार के मंत्रियों के साथ मिलकर इस बिल को सही ढंग से बनाने हेतु ४ माह से सरकार के साथ बैठकें कर रही थी और ये लोग ही इस बिल को जला रहे हैं | जलाना भी चाहिए, अरविंद केजरीवाल ठीक कहते हैं कि  इस देश में कोई सरकार नहीं है क्योंकि वो देश के काम आने को तैयार ही नहीं है |  अन्ना और उनकी टीम ने प्रत्येक मंच पर अपनी बात रखी पर सरकार ने हर स्तर पर टीम अन्ना पर लांछन लगाकर एक अच्छे लोकपाल बिल की भ्रूण हत्या करने की कोशिश की, यह जानते हुए भी की १२१ करोड़ हिन्दुस्तानी बच्चे नहीं हैं और सब इनकी चालाकियां समझ रहे हैं | 

सुषमा स्वराज का लोकसभा में दिया गया तर्क पूर्णतः सत्य है कि जब कैबिनेट मंत्री लोकपाल के दायरे में हैं तो प्रधानमन्त्री क्यों नहीं ? सरकार कहती है कि टीम अन्ना द्वारा कि गई मांग संविधान के खिलाफ है अतः प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में नहीं रखा जा सकता है जो कि सरासर गलत है | प्रधानमंत्री सीबीआई की जांच के दायरे में आते हैं मतलब उनपर भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाया जा सकता है और दूसरा संवैधानिक तथ्य यह है कि भारत का संविधान यह कहता है कि प्रधानमंत्री मंत्रियों में प्रथम है न कि मंत्रियों से ऊपर| साथ ही, मंत्रीमंडलीय उत्तरदायित्व का सिद्धांत भी यही कहता है कि यदि एक मंत्री पर भी आरोप सिद्ध हुआ तो सबकी छुट्टी होगी अर्थात मंत्रिमंडल में सभी समान हैं , ना कोई बड़ा है न कोई छोटा है | तो फिर प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होने ही चाहिए क्योंकि राजा ही भ्रष्ट होगा तो उसके अधीनस्थ से आप ईमानदार होने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं | 

कांग्रेस की हालत खिसियानी बिल्ली जैसी हो गई है, लाख कोशिशों के बावजूद वह बाबा रामदेव और टीम अन्ना को नीचा नहीं दिखा पाई है |  खुद सोनिया गाँधी की लोकप्रियता घट रही है और उनपर से जनता का विश्वास कम हो रहा है | ऐसे में हमारे मौनी बाबा माननीय प्रधानमंत्रीजी और राहुलजी कैसे अन्ना, देश, और विपक्ष को संभालेंगे यह तो वही जानें | देखिये, राजनीति के रंगमंच पर और क्या-क्या होना है ? भ्रष्टाचार पर लड़ाई आर-पार की होनी चाहिए ताकि जनता के धन का सदुपयोग हो और निचले तबके को सरकारी धन से जीवनोपयोगी मदद मिल सके |

SHARABI KA GHUM

Ghum ko bhulane ke liye roj thodi thodi piya karte hain 
khud se marte nahi bus thodi thodi jiya karte hain


kadwa hai ghoont sharaab ka magar fir bhi peete hain
tere thappad se nahi sarkaar par pyaar se hum darte hain  


jo pilane se manaa kar dega saaqi to ham bin piye mar jayenge
jo tujhe dekh liya bin piye to seedhe swarg jayenge 


hans mat meri ye jalaalat dekhkar besharam
kahin hum bhi ho gaye tumse to pahunchoge narak teri kasam


jeeyo, khoob jiyo, tumko hamaari hai kasam
hame ambulance tak tumhi to le jaoge sanam 


kyonki, Ghum ko bhulane ke liye roj thodi thodi piya karte hain 
khud se marte nahi bus thodi thodi jiya karte hain......... !!

ग़म को भुलाने के लिए रोज थोड़ी -थोड़ी पिया करते हैं 
खुद से मरते नहीं बस थोड़ी -थोड़ी जिया करते हैं

कड़वा है घूँट शराब का मगर फिर भी पीते हैं
तेरे थप्पड़ से नहीं सरकार पर प्यार से हम डरते हैं   

जो पिलाने से मना कर देगा साकी तो हम बिन पिए मर जायेंगे
जो तुझे देख लिया बिन पिए तो सीधे स्वर्ग जायेंगे 

हंस मत मेरी ये जलालत देखकर बेशरम
कहीं हम भी हो गए तुमसे तो पहुंचोगे नरक तेरी कसम

जीयो, खूब जियो, तुमको हमारी है कसम
हमें अम्बुलंस तक तुम ही तो ले जाओगे सनम 

क्योंकि, ग़म को भुलाने के लिए रोज थोड़ी - थोड़ी पिया करते हैं 
खुद से मरते नहीं बस थोड़ी -थोड़ी जिया करते हैं......... !!

2.8.11

Do Pal ke liye

kyon na tham jaayen do pal ke liye
eksaar ho jeevan do pal ke liye
ho hathon me haath do pal ke liye
karni na ho koi baat do pal ke liye

sheetal pawan ki chhuan do pal ke liye
ye jannat ka nazara do pal ke liye
samete nainon se boonden do pal ke liye
gum hon hare aanchal me do pal ke liye

prapaat ka gaan goonje do pal ke liye
patangon ki 'gun' 'gun' do pal ke liye
hriday me manoram prasfutan do pal ke liye
kudrat se ho dil ki baat do pal ke liye

aankhon me muskurahat do pal ke liye
sab par ho vishwaas do pal ke liye
aisi gahari anubhooti do pal ke liye
ishwar ka sakchhatkaar do pal ke liye 


क्यों ना  थम जायें दो पल के लिये
एकसार हो जीवन दो पल  के लिये
हो हाथों में हाथ दो पल के लिये
करनी ना हो कोई बात दो पल के लिये

पवन की छुअन दो पल के लिये
ये जन्नत का नज़ारा दो पल के लिये
समेटे नैनों से बूँदें दो पल के लिये
गुम हों हरे आँचल में दो पल के लिये

प्रपात का गान गूंजे दो पल के लिये
पतंगों की 'गुन ' 'गुन ' दो पल के लिये
ह्रदय में मनोरम प्रस्फुटन दो पल के लिये 
कुदरत से हो दिल की बात दो पल के लिये

आँखों में मुस्कराहट दो पल के लिये
सब पर हो विश्वास दो पल के लिये 
ऐसी गहरी अनुभूति दो पल के लिये
ईश्वर का साक्षात्कार दो पल के लिये 


Meri Pari

Yah sach hai ki tumhare mor-se par nahin
yah sach hai ki koyal-si mithi tumhari kalrav nahin


Yah sach hai ki tumhare krishn se kale kuntal nahin
yah sach hai ki tum mriganayani nahin


Yah sach hai ki tum gulaab ki pankhudi nahin
par kise hai parvaah in pratimanon ki


Anokhi, natkhat, aankhon se dil lubhane wali
radha si pyari, hirani si uchhalane wali


Meri pari ho tum jeevan 'sudha' banane wali
meri pari ho tum aangan me kalrav goonjaane wali