31.5.11

Besharm Doctor

आंध्र प्रदेश के एक जिले खम्मम में एक १६ वर्षीय किशोर 'बाबू' इंसानी लापरवाही और असंवेदनशीलता का शिकार हो गया. एक महीने पहले बाबू को एक पागल कुत्ते ने काट लिया जिसके कारण उसे अस्पताल ले जाया गया परन्तु खम्मम  के अस्पताल में डॉक्टर ने रेबीज़ का इंजेक्शन न होने का बहाना बनाकर उसे केवल एंटी-बायोटिक का इंजेक्शन लगाकर लौटा दिया.  डॉक्टर की इस लापरवाही की वजह से बाबू का सही समय पर इलाज नहीं हो पाया और आज बाबू की मौत हो गई.
गाँव के लोगों का कहना है कि बाबू के पिता नरसिम्हा और माँ सविताराम्मा के पास रेबीज़ का इंजेक्शन खरीदने के लिए ४०० रुपये नहीं थे इसलिए डॉक्टर ने बहाना बनाकर उन्हें चलता कर दिया. बेटे के इलाज के लिए माता-पिता दर-दर भटकते रहे पर किसी भी अस्पताल में बाबू को एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन नहीं लगाया गया. पैसे के भूखे डॉक्टर बाबू को तडपता देखकर भी नहीं पसीजे और अंततः बाबू की हालत इतनी खराब हो गई कि उसे सुधारना भी नामुमकिन हो गया. 
बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, आज ही आंध्र प्रदेश के एक मंत्री श्री रामी रेड्डी ने बाबू कि माँ को टीवी के सामने रुपये देकर चुप कराने की कोशिश की जैसे वो कह रहे हों कि जान से बढ़कर रुपये हैं, रख लो . वहीँ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डी एल रविन्द्र रेड्डी का कहना है कि राज्य में रेबीज़ के इंजेक्शन पर्याप्त मात्र में हैं, इस बात की तस्दीक खम्मम के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने भी की है. जबकि सच यह है कि पिछले दिनों राज्य में रेबीज़ के कारण कई जाने जा चुकी हैं और उसकी वजह रेबीज़ के इंजेक्शन की राज्य में अनुपलब्धता ही है. 
बाबू तो चला गया पर यह सवाल जरुर राज्य शासन के लिए छोड़ गया है कि क्या दवा का स्टॉक होना ही पर्याप्त है या उसका सही समय पर प्रयोग करने की जिम्मेदारी भी डोक्टरों को सिखाने की जरुरत है. आश्चर्य की बात है कि इंसान को इंसान होना सिखाने की जरुरत है इस देश में. अब कलेक्टर साहब दोषी डॉक्टर पर कार्यवाही करेंगे जबकि बाबू का वापस आना नामुमकिन है. सिर्फ जिला अस्पताल ही क्यों, उन समस्त डॉक्टरों की डिग्री रद्द कर देनी चाहिए जिन्होंने बाबू को इंजेक्शन देने से मना किया था. जब डॉक्टर के अन्दर इंसानियत ही नहीं है तो उसका ज्ञान बेकार है . 

28.5.11

Fundamental Right of Freedom

आज़ादी ऐसा शब्द है जिसके मायने हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं. किसी के लिये आज़ादी का मतलब अपने देश को परदेशियों की हुकूमत से मुक्त करना है तो किसी के लिए अपने ही व्यक्ति के कुशासन से देश को मुक्त करवाना आज़ादी है. किसी के लिए मनपसंद कार्य करने की छूट आज़ादी है तो किसी के लिए मनपसंद जीवनसाथी चुनना आज़ादी है. कहने का मतलब यह है की आज़ादी परोक्ष भावना है जो शहर, गाँव, उच्च वर्ग-निम्न वर्ग, स्त्री-पुरुष के अंतर के अनुरूप निर्धारित होती है.
भारत में आज़ादी को व्यापक रूप में देखा गया है अतः  हमारे संविधान में ना केवल संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता का उल्लेख किया गया है अपितु अनुच्छेद १९ के तहत स्वतन्त्रता को प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार घोषित किया गया है. जिसके अंतर्गत ६ स्वतंत्रताएं प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है. ये हैं, विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अस्त्र-शस्त्र रहित शांतिपूर्ण सम्मेलन की स्वतंत्रता, समुदाय एवं संघ निर्माण की स्वतंत्रता, भारत में भ्रमण, निवास एवं व्यवसाय की स्वतंत्रता. स्पष्ट है की मानव की मूल प्रकृति को देखते हुए भारत का संविधान अपने प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है. 
यह सच है की किसी भी व्यक्ति के जीवन से ये स्वतंत्रताएं कम कर दी जाएँ या हटा दी जाएँ तो वह व्यक्ति गुलामों की श्रेणी में आ जाएगा. ये सभी स्वतंत्रताएं ना केवल देश के स्तर पर अपितु व्यक्तिगत स्तर पर भी आवश्यक हैं. एक व्यक्ति जब तक अपने आपको अपने स्वरुप के अनुरूप प्रकट नहीं कर लेता तब तक उसे अपना जीवन बेमानी लगता है. सोने के पिंजरे में बंद चिड़िया भी खुले आकाश के स्वप्न देखती है यह जानते हुए भी कि बाहरी जीवन दुष्कर होगा. यह बात अलग है कि कुछ परिंदे कभी-कभी जान बूझकर पिंजरे में रहते  हैं क्योंकि उन्हें अपने मालिक से अनन्य स्नेह हो जाता है और पिंजरे में रहना उन्हें संग लगता है ना कि परतंत्रता. 
यही भारतीय दर्शन का भी आधार है जिसके तहत गुजरात हाई कोर्ट ने पिंजरों में कैद पक्षियों को मुक्त करने हेतु दायर याचिका में अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि सभी पक्षियों को खुले आकाश में उड़ने का अधिकार है अतः उन्हें पिंजरे में रखना उनके स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है. सभी स्वतंत्रता समर्थक तथा पक्षी प्रेमियों के लिए ये बेहद प्रसन्नता का क्षण क्योंकि सभी ४९४ पक्षियों को पिंजरे से मुक्त कर दिया गया है. स्पष्ट है कि स्वतंत्रता केवल मानव नहीं अपितु सभी चराचर जीवों का मूल अधिकार है और हमें सभी के स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करना चाहिए.

24.5.11

Shanu ka Janm

   मैं जबलपुर में अपनी नानीजी के घर में थी जो की एक बड़े परिवार की आवश्यकता को देखते हुए तीन मंजिलों वाला घर था और हर मंजिल में छः कमरे थे. उन दिनों बड़े परिवारों का चलन होता था और घर के मुखिया का काम सबका पालन-पोषण होता था.भारत में आज से २०  वर्ष  पहले पुरुषप्रधान समाज होता था  जहाँ घर का मुखिया पुरुष होता था और वही कमाने जाता था जबकि स्त्रियाँ केवल खाना बनाने  तथा घर का रखरखाव करने का काम करती था . हालाँकि मेरे नानाजी अपने समय में बंधकर कभी नहीं रहे और अपनी सभी लड़कियों को कोलेज तक की शिक्षा दिलाई जो कि एक आम बात नहीं थी और साथ ही घर के सामने स्थित हनुमान ताल में सभी नाती-नातिनों और पोते-पोतियों को तैरना भी खुद सिखाया.
  उन दिनों घर के  काम आसान नहीं थे  क्योंकि पहले चटनी पिसने, दोसे का घोल बनाने और कपडे धोने के लिए इलेक्ट्रानिक सामान नहीं होते थे. इसलिए हम सभी छोटे बच्चे -बच्चियां घर के काम में बड़ों की मदद करते थे और होड़ लगाकर ज्यादा काम करते थे ताकि हमारी मम्मियां हमसे प्रसन्न रहें और हमें खूब खेलने मिले. इस संयुक्त परिवार में ४ बुजुर्ग , जिसमे एक दम्पती नानाजी और नानीजी थे जिनके ९ बच्चे थे, जिनमे ६ लड़कियां और ३ लड़के थे.     
  २५ मई (१९८९/१९९०) की सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी,एक अजीब सा उत्साह और आने वाले शिशु के बारे में जानने की उत्सुकता भी बहुत थी मेरे मन में. ज्यादा उम्मीद एक प्यारी-सी लड़की की थी क्योंकि हमारे मंझले मामाजी पहले से ही एक पुत्र के पिता बन चुके थे. हम सब घर में खुशखबरी का इंतज़ार कर रहे थे किचेन में बैठकर चाय बनाई जा रही थी और नाश्ते की तैयारी चल रही थी की मामाजी तेजी से सीढियाँ चढ़ते हुए ऊपर आये और हमें बड़ा जोर से मुस्कुराते हुए संतुलित आवाज में बताया की मामीजी ने पुनः पुत्र को जन्म दिया है.' क्या?!! नहीं मामाजी, आप झूठ बोल रहे हैं , हम लोगों को उल्लू बना रहे हैं आप .' हमेशा की तरह मैंने सीरियल वाले अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी. वैसे मैं पूरी तरह गलत नहीं थी क्योंकि हमारे मामाजी को किसी को उल्लू बनाने में बड़ा मजा आता है, इसलिए जब वो मुस्कुराकर नीचे की तरफ देखते हुए कोई बात कहते हैं तो 'दाल में कुछ काला है' की फीलिंग आ ही जाती है.
  बार-बार पूछने पर भी जब जवाब 'लड़का हुआ है , हम कह रहे हैं ना' ही मिला तो हमें मामाजी की बात पर यकीन आ ही गया. फिर क्या था... मारे ख़ुशी के हम सब उछलने लगे और मामाजी को बधाइयाँ दीं. सबको फोन से खबर देने के बाद जब मामाजी नहा कर  और नाश्ता करके फ्री हो गए तब हम दोनों बहनें लटक गईं उनपर की वो हमें अस्पताल ले चले अपने साथ, हम भी नवजात शिशु को देखने के लिए बेताब थे. हम दोनों मामाजी की स्कूटर में उनके पीछे बैठकर चल दिए अस्पताल. वहां मुस्कुराती हुईं मामीजी को देखा और अपने छोटे प्यारे-से  भाई से भी मिले जो बेहद भोला लग रहा था. चूंकि ये शिशु श्री भानुजी के अनुज थे इसलिए इनका नाम पड़ा 'शानू'. 

  शानू बहुत ही भोला और कांफिडेंट लड़का है बचपन से , सबसे लडियाना, मामीजी  से चिपकना, भानु के साथ मिलकर सबकी बैंड बजाना और महेंदी की वही डिजाईन लगवाना जो मामीजी के हाथों में लगी हो उनकी बचपन की विशेष यादों के रूप में मेरे ह्रदय में संयोजित हैं . बचपन की इनकी मस्ती अब भी ख़त्म नहीं हुई है, शानू २१ वर्ष के होंगे और आज भी जब बोलना शुरू करते हैं तो भोलेपन और शरारत का मेल उन्हें बेहद प्यारा बना देता है. अब शानू 'मृदुल' बन गए हैं और मृदुल अब इंजिनीअर बन गए हैं. मृदुल आगे भीऔर तरक्की करें  ऐसी उन्हें जन्मदिन के दिन मेरी शुभकामनाएं हैं ! हैप्पी बर्थ डे शानू !! 


23.5.11

Missing my frnd Manju

आज मंजू की बहुत याद आ रही है. मेरी बचपन की सहेली, जो कक्षा ९ तक मेरे साथ पढ़ती थी. बहुत मस्तीखोर और अच्छी लड़की थी. हम ७-८ लड़कियों का ग्रुप था. मंजू हम सब में लम्बी थी और पढाई में ठीक-ठाक थी. उम्र में शायद हमसे २-३ साल बड़ी थी. चलती थी हमेशा लहराकर, उसे टोको तो हँस देती और फिर वैसे ही चलने लगती.  उसके पापा का फोटो स्टूडियो है जो ठीक-ठाक चलता है . मंजू का घर भी वहीँ है, उसके घर मैं कभी गई नहीं थी सिर्फ उस दिन  के अलावा जिसके बाद से मंजू की ज़िन्दगी ही बदल गई. 

एक दिन की बात है जब हम सब एक सामान्य दिन की ही तरह स्कूल में खेल रहे थे और एक -दूसरे के सपनों को जान रहे थे. वो बाली उम्र थी और सपने अपने राजकुमारों के थे. किसी को लम्बा लड़का चाहिए था अमिताभ बच्चन की तरह ,तो किसी को तगड़ा लड़का सलमान खान की तरह. मुझ उस समय आमिर खान बहुत पसंद थे तो मुझे जीवनसाथी भी वैसा ही शालीन और क्यूट सा चाहिए था. मंजूजी की चोइस सबसे अलग थी इन्फेक्ट इन सबका मिश्रण थी और इतना बताकर ही वो बहुत जोर से खिलखिलाकर हंस दी जोकि उसकी विशेषता थी. हम भी हंस दिए जोर से. ये भी हमारे ग्रुप की विशेषता थी, खुद पर जोर से हँसना. 

उस दिन मंजू बात करती हुई स्कूल से कुछ २ किलोमीटर दूर अपने घर पहुंची तो उसके होश ही उड़ गए. घर खुला था और चौके से जलने की गंध आ रही थी. मंजू दौड़ते हुए अन्दर गई और देखा कि आंटीजी (मंजू की मम्मी )बुरी तरह जली हुईं थीं. मंजू ने दौड़कर पापा को बुलाया और मम्मी को उठाकर अस्पताल भेजा. हुआ ये था कि आंटीजी गैस पर दूध रखकर किसी और काम में लग गईं थीं और दूध पूरा गैस में गिर गया. जब तक आंटीजी काम से लौटीं तब तक किचेन में काफी गैस फ़ैल चुकी थी परन्तु दूध की गंध के कारण गैस की गंध दब गई. फिर क्या, आंटीजी ने जैसे ही गैस चालू की आग की चपेट में आ गईं. 

अस्पताल में आंटीजी को मृत घोषित किया गया। इसके साथ ही वो अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर चली गईं. मंजू तीन भाई- बहनों में दूसरे  नंबर पर थी और बहनों में बड़ी बहन थी हालाँकि उम्र में तो छोटी ही थी परन्तु इस हादसे के बाद घरवाले उसकी शादी के पीछे पड़ गए. मंजू बिलकुल भी शादी नहीं करना चाहती थी. हमसे बात करते-करते रो पड़ती थी. परन्तु घर वालों के दबाव में ९ वी का एक्साम देकर वो अपनी उम्र से काफी बड़े पुरुष जो उस समय कुछ ३० वर्ष के थे की पत्नी बन गई. 


आज मैं भी ३० पार कर चुकी हूँ, सोचती हूँ तो बहुत अजीब लगता है, कैसे रही होगी मंजू इतने बड़े उम्र के पति के साथ. इस बीच कई बार मेरा मंजू के भाई - बहन से मिलना हुआ, पूछने पर पता चला कि मंजू ठीक है. भगवान करे वो हमेशा खुश रहे और वैसी ही खिलखिलाती भी रहे. जीवन के संघर्ष में हमें अपना मूल सवभाव नहीं बदलना चाहिए क्योंकि यह हमें  हमारा ' god gift ' है.  







21.5.11

Sun , kaun bol rahaa hai ?

मुझसे तू नहीं तेरा ढोंग बोल रहा है
Mujhse tu nahin tera dhong bol raha hai
ये तेरा प्यार नहीं तो कौन बोल रहा है 
Ye tera pyaar nahin to kaun bol raha hai

मैं नहीं तेरे प्यार के काबिल सुन लिया बहोत
Main nahi tere pyaar ke kaabil sun liya bahot 
मुझपर तेरा गुस्सा तो कुछ और बोल रहा है
Mujhpar tera gussa to kuchh aur bol raha hai

माना कि गिला बेहिसाब हैं तुझे मुझसे पर
Maana ki gila behisaab hain tujhe mujhse par
तेरे-मेरा कल तो मुझे 'अच्छा' तौल रहा है
Tera-mera kal to mujhe 'achchha' taul raha hai

कभी टूटे दिल के जख्मों पर मलहम न लगाया
Kabhi tute dil ke jakhmon par malhum naa lagaaya
फिर भी देख कैसे प्यार बोल रहा है
Fir bhi dekh kaise pyaar bol raha hai 

बिन आंसू बहाए निगाहें देखती रहीं तेरी तरफ
Bin aansoo bahaye nigaahen dekhti rahin teri taraf 
शब्द क्या बयां करेंगे जो हाल दिल बोल रहा है 
Shabd kya bayan karenge jo haal dil bol raha hai

सुनने कि कोशिश तो कर, दिल क्या बोल रहा है
Sunne ki koshish to kar, dil kya bol raha hai 
ये 'प्यार' नहीं तो कौन बोल रहा है
Ye 'pyaar' nahin to kaun bol raha hai 

Mamta`s oath

ममता बैनर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की शपथ लेकर ना केवल महिलाओं वरन समस्त स्वाभिमानी लोगों का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है. ७ जून १९९३ को कोलकाता के सी एम् हाउस में हुए अपने अपमान का बदला बेहद लोकतान्त्रिक तरीके से लेते हुए उन्होंने जनता को यह सन्देश दिया है कि यदि इरादे बुलंद हों तो निरंकुश और शक्तिशाली शासन भी हिलाया जा सकता है.

ममता सदैव जनता कि भलाई हेतु निर्णय लेती रहीं और उनके हक कि लड़ाई लडती रहीं. आज उन्हें अपने जुझारूपन का फल मिल गया है. उनसे सभी को बहुत उम्मीदें हैं, आज तक के उनके राजनीतिक सफ़र को देखते हुए लगता है कि वो आगे भी जनता के हित में ही फैसले लेंगी. 

ममता बैनर्जी कि सबसे बड़ी परीक्षा अब है. उन्हें ना केवल विकास करना है बल्कि अपने संगठन को सत्ता से मिलने वाले दंभ से भी बचाना है. यह आसान नहीं है. इसके लिए ममता को लगातार जनता के सीधे संपर्क में रहना होगा ताकि जनता उनसे अपने दिल कि बात बेझिझक कह सके. 

19.5.11

The Judgement Day

      'ओह! गांगुली केवल १८ रन बनाकर आउट हो गया ?!! मुझे तो लगा था कि आज गांगुली की हाफ सेंचुरी जरुर बनेगी|' शैली अपसेट हो गई और उठकर सब्जी चलाने किचन पहुँच गई| 'सब्जी तो तैयार हो गई' शैली ने सोचा,'अब रोटियां बनाना भी शुरू कर देती हूँ इससे पहले की अरविन्द आये ।' कुछ चार या पांच रोटियां ही सिकी होंगी कि घर की डोरबेल बजी| शैली हाथ पोंछती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ी| उसने थकान छिपाकर मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला| अरविन्द  बेहद थका हुआ था। ब्रिफकेस सोफे पर रखते हुए बोला, ' बहुत गर्मी है, ४३ डिग्री टेम्परेचर है आज , हालत खराब हो गई|' शैली ने एक गिलास ठंडा पानी दिया, ' कैसा रहा आज का दिन अरु?' एक बार में पूरा पानी पीते हुए अरविन्द ने कहा,' मत पूछो.. अभी मैं बहुत  थका हुआ हूँ। खाना बन गया है क्या? जल्दी से दे दो ,बहुत  भूख लगी है।'
     अरविन्द ने टीवी खोला और स्टार स्पोर्ट्स लगाते हुए पूछा, 'गांगुली आज खेला क्या? किसने जीता टॉस?' शैली ने कहा,' पुणे ने | गांगुली आउट हो गया १८ रन बनाकर |' 'शिट!' अरविन्द ने चैनल बदल दिया| जबतक शैली ने खाना परोसा अरविन्द फ्रेश होकर आ गया और खाने की टेबल में बैठ गया| दोनों खाना खाते -खाते समाचार देखते जा रहे थे.| शैली ने अपने हाथ से बनाया लाल मिर्च का भरवाँ आचार दिया तो अरविन्द उसकी तरफ मुस्कुराकर देखने लगा। शैली भी मुस्कुराने लगी। अरविन्द ने न्यूज़ चैनल लगा दिया | शैली न्यूज़ देखते हुए बोली, ' पता है हम सिर्फ दो दिनों के मेहमान हैं| ' अरविन्द ने मुस्कुराते हुए पूछा,' तुम्हे कैसे पता?' शैली ने आँखों से टीवी की तरफ इशारा किया| 
     'एक अमेरिकी ज्योतिषी ने ऐलान किया है की २१ मई २०११ को दुनिया तबाह हो जाएगी... क्या ज्योतिषी का दावा सच है? क्या हमारा ज्योतिष भी यही कहता है? पूरी दुनिया में इस भविष्यवाणी को लेकर बहस हो रही है, क्या हम सिर्फ ४८ घंटों के मेहमान  हैं ? ' 'उंह! ये टीवी वाले! लगे रहते हैं सबको उल्लू बनाने में| कोई काम नहीं है इन्हें |' अरविन्द ने खाना ख़तम किया और बेडरूम की तरफ चला गया | शैली ने जल्दी से किचेन साफ़ किया और फ्रेश होकर बेड पर लेट गई| जब तक अरविन्द अपनी नोवेल के पेज पलटते हुए उससे कुछ पूछता, शैली सो चुकी थी| अरविन्द कुछ देर तक उसे देखता रहा फिर वह भी अपनी तकिया को शैली की तकिया से चिपकाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर सो गया। जैसा कि वास्तु शास्त्र अच्छी शादीशुदा जिंदगी के लिए सजेस्ट करता है | 
    रात को करीब २.३० पर एकदम से पलंग हिला | शैली और अरविन्द दोनों गहरी नींद में थे उन्हें कुछ नहीं पता चला | एक मिनट के अन्दर फिर से पलंग हिला | एकदम से शैली उछल कर उठी और अरविन्द को हिलाकर बोली,' अरु! उठो! भूकंप आ रहा है ।' अरविन्द हडबडाकर उठा और बोला, 'क्या ?' टीवी बैठ गया है क्या दिमाग में ? कुछ भी बोले जा रही हो। ' कि तभी एक झटका और लगा | अरविन्द की तो नींद ही उड़ गई| 'बाहर चलो',दोनों घर से बाहर की तरफ भागे | तभी अरविन्द कुछ सोचता हुआ अन्दर की तरफ दौड़ा | शैली ने उसे रोकने के लिए हाथ पकड़ा पर वो नहीं रुका। जोर से चिल्लाता हुआ बोला' कुछ रुपये रख लेता हूँ|' शैली के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं | उसने बाहर का दरवाजा खोल रखा था| पूरी बिल्डिंग के लोग घबरा कर बाहर की तरफ भाग रहे थे| जल्दी से दौड़ते हुए खुद को गिरते हुए टीवी से बचाते अरविन्द आगे बढ़ ही रहा था तभी कुर्सियां सरक कर उसके सामने आ गई| उसने कुर्सियां हटाकर दौड़ लगाई| खिड़कियाँ और अलमारी का शोर बढ़ रहा था| १० मंजिल ऊँची बिल्डिंग से लोग बाहर की और भाग रहे थे, बहुत शोर हो रहा था| अरविन्द को सामान में फंसा देख शैली की घबराहट बढती जा रही थी|
        मिसिज दत्ता शैली को चिल्लाई, 'क्या देख रही हो, मरना है क्या? भागो जल्दी, जल्दी भागो|'  शैली और जोर से घबरा गई और चिल्लाई ,' अरु ! जल्दी|' अरविन्द हड़बड़ाता हुआ पैसे संभलकर बाहर आया | दोनों आपस में टकराते हुए सीढियों से नीचे दौड़ रहे थे कि एक छोटी सी ७ साल की स्वीटी उनसे टकरा गई| शैली ने उसे सम्भाला । सातवे माले में ही उसके घर के सामने रहने वाले सिंग अंकल की पोती| शैली ने स्वीटी को गोद में उठाया और अरविन्द का हाथ जोर से पकड़कर नीचे उतरने लगी | पूरी सीढ़ी लोगो से भरी थी, सब एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे|  बच्चे और बूढ़े फंस गए थे | कुछ लोग सिर्फ अपनी सोच रहे थे और लोगो को कुचलते हुए, धकलते हुए आगे बढ़ रहे थे | तो वहीँ कुछ एक-दो लोग, अशक्त लोगो की मदद कर रहे थे | उन्हें देखकर कुछ और लोग भी मदद को आगे बढे और औरतों को पहले नीचे उतरने दिया और पीछे छूट गए लोगों की मदद करने लगे| 
    अचानक शैली धक् से रह गई 'अरु का हाथ उसके हाथ में नहीं था|' 'अरु कहाँ है? ' उसके कदम ठिठक गए पर स्वीटी की खातिर वो आगे बढ़ गई| वो जानती है, अरु दूसरों को निकाल कर ही आएगा ' पर वो खुद न फंस जाये', शैली के चेहरे पर डर बढ़ता जा रहा था| स्वीटी भी घबरा कर जोर से रो रही थी | खुद को संभाले या स्वीटी को चुप करे, अरु कहाँ है? यही सब सोचती हुई धड -धडाकर लगभग फिसलती हुई वह नीचे उतरने लगी| कि तभी किसी ने उसे बुरी तरह कंधे पर धक्का दिया| स्वीटी का सर दीवार पर लग गया और वो और जोर से रोने लगी| शैली चिल्लाई, 'तुम्हे अपनी जान की पड़ी है बस !' पलट के देखा तो संगम था | शैली ने उसे गुस्से से देखा पर वो अनदेखा कर फिर से धक्का मारकर सीढियों से नीचे उतर गया| 
   भूकंप के झटके बढ़ते जा रहे थे | बिल्डिंग बुरी तरह हिल रही थी| शैली ने स्वीटी को जोर से सीने से चिपकाया और उसे चुप करते हुए नीचे उतरने लगी|  अब स्वीटी भी शैली से चिपककर चुप हो गई| शैली नीचे पहुंचकर सबके साथ खड़ी हो गई और स्वीटी की पीठ सहलाने लगी | उसकी कुछ सहेलियें भी वहाँ खड़ी थी | तभी नीत्ता ने शैली के कंधे पे हाथ रखते हुए पूछा ' अरविन्द भाईसाहब कहाँ है?' शैली ने कहा ' पता नहीं| लोगों की मदद कर रहे हैं| मेरा तो दिल बैठा जा रहा है| किसी तरह स्वीटी को बचाते हुए नीचे आई हूँ| ' इतने में एक तेज भूकंप का झटका आया और पूरी बिल्डिंग ताश के पत्ते की तरह गिरने लगी | शैली आँखें फाड़कर देखती रह गई| हे भगवन!  ये क्या हो रहा है ? अरु अन्दर है | 
    शैली को चक्कर आने लगे | वो चिल्लाने लगी, ' अरु! अरु!' कितनी घुटन हो रही थी| वो बार बार भगवान् से प्रार्थना कर रही थी की अरु ठीक हो | पर पता नहीं वो कहाँ है , क्या करूँ? कितनी कोशिश की पर आवाज तक नहीं निकल रही थी गले से | ' अरु!' स्वीटी और जोर से रोने लगी | शैली के कुछ समझ नहीं आ रहा था | पूरी बिल्डिंग गिर चुकी थी और अरु कहीं नहीं दिख रहा था न ही स्वीटी के पापा दिख रहे थे| इतने में स्वीटी के दादाजी सामने आये और शैली से बोले 'बेटा डर मत | अरविन्द भी आता होगा| वो नीचे तक आ गया था| तब शैली की जान में जान आयी और वो तेजी से बिल्डिंग की तरफ भागी | तभी किसी ने उसका कंधा छूकर उसे हिलाया | शैली कुछ नहीं सुनना चाहती थी पर वो आगे भी नहीं बढ़ पा रही थी | कि एकदम से शैली आँखों के सामने अँधेरा छा गया |अरविन्द की आवाज आई, ' शैली! क्या हुआ? इतनी डर क्यों गई हो?' अरविन्द ने शैली के माथे पर आया पसीना पोछा और पूछा।

   शैली बेहद घबराई हुई थी | उसने आँखें खोली और अरविन्द की तरफ देखते हुए बोली ' कुछ नहीं | मैं सपना देख रही थी | तुम ठीक तो हो ना?' अरविन्द ने शैली का हाथ पकड़कर कहा , ' हाँ | सब ठीक है| ' शैली एकटक अरविन्द की तरफ देखने लगी। उसे लगा जैसे कुछ बदल गया है आज उसके अन्दर | उसने तकिया बेड के सिरहाने रखा और अरविन्द को भी उसी तरफ आने को कहा | उसे पता था कि  आज वाकई में जजमेंट डे था | वो और अरविन्द साथ में अच्छे से रहने के लिए किसी शास्त्र के नहीं बल्कि प्रेम के मोहताज हैं जो उनके बीच है और कयामत के दिन तक रहेगा । अब शैली आराम से सो गई | अरविन्द को समझ नहीं आया कि तकिया की दिशा अचानक  क्यों बदल दी गई ? वह एकटक बस शैली के चेहरे की शांति और मुस्कराहट देख बिना कुछ पूछे सो गया। 

17.5.11

Ahum se Brahm tak ki yatra

    कभी अकेले बैठे सोचती हूँ कि मैं कौन हूँ ? मैं क्या हूँ? मैं जो हूँ वो क्यों हूँ या जो नहीं हूँ तो क्यों नहीं? कभी सोच दूसरों कि तरफ जाती है तो कभी पता नहीं कहाँ चली जाती है जैसे कि मन ने तय ही कर लिया हो कि एक जगह तो नहीं बैठना है| सोचते सोचते उन महात्माओं के बारे में सोचती हूँ जो कहते हैं कि इस जग में मेरा कुछ नहीं, सब मिथ्या है| सही कहते हैं ऐसा लगता है | आज बुद्धपूर्णिमा है, वह दिन जब भगवान् बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था नीलांजना नदी के पास एक वटवृक्ष के नीचे जिसे अब बोधिवृक्ष कहा जाता है| यह जगह बिहार के बोधगया में है और यह जगह वर्ल्ड हेरिटेज बन गई है| 
    जबतक हमारी सोच 'मैं' तक सीमित रहती है हम छोटी-छोटी बातों में ही उलझे रहते हैं और हर छोटी हसरत पूरी करके भी सोचते हैं कि हजार ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले| अपनी निराशा से बचने के लिए 
इसके बाद जब हम 'अहम' से 'त्वम' कि तरफ बढ़ते हैं तो और घपले शुरू हो जाते हैं| जैसे ही हम 'त्वं' पे अपनी अच्छाइयों और उसकी बुराइयों को प्रकट करते हैं तैसे ही हमें हमारी असलियत दिखा दी जाती है|  और हम फिर ठगा महसूस करते हैं| क्या करें कुछ समझ नहीं आता है|
    उसके बाद जैसा कि इंडिया में होता है हम 'तवं' से 'वयं' कि तरफ बढ़ते हैं|  मदद कर हम सुखानुभूति प्राप्त करने के झूठे सपने संजोये होते हैं, वही कृतघ्न लोग हम पर नाना कारणों से पत्थरबाजी कर रहे होते हैं| फिर लगता है, अरे बाप रे बाप! कहाँ फंस गए हम | ऐसा होते वक़्त तो बड़ा बुरा लगता है पर आध्यात्म कि राह यहीं से शुरू होती है, कष्टों को देखकर ही हम ये जान पाते हैं कि न अहम् सत्य है न तवं पूर्ण है न वयं में ही पूर्णता है| तो वो क्या है जो है परन्तु हमें दिखता नहीं है?
    यही जानने निकले थे राजकुमार सिद्धार्थ| जीवन के समस्त सुखों को भोगकर भी वो सुखी न हुए और कठोर तप करके भी अंतिम सत्य को ना जान पाए| अंत में जब समस्त असफल प्रयासों से थके हारे बुद्ध जब बोधिवृक्ष के नीचे बैठे थे कि तभी उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ और वो सिद्धार्थ से बुद्ध बन गए|  एक पल जिसने  एक हांरे हुए इंसान से  उन्हें ईश्वर  बदल दिया| उस समय ना वो राजकुमार थे ना ही गृहस्थ और ना ही कोई ऋषि-मुनि बल्कि एक ऐसे इंसान थे जिनमें संतुलन था जो प्रकृति में है और वो ब्रह्मत्व को प्राप्त हुए| उन्हें अपनी सम्पूर्णता का अहसास हुआ और साथ ही प्रकृति से अपने जुड़ाव का भी| 
    ऐसी ही यात्रा हम सब कर रहे हैं जाने अनजाने | अहम् से त्वम, त्वम से वयम और वयम  से ब्रह्म तक की यात्रा | वह यात्रा जिसमे हममे निहित सत्व, तमस, और रजस गुण संतुलन में आ जाते हैं और हम सभी कर्म बंधनों से खुद को आजाद पाते हैं |  

15.5.11

EKLA CHALO RE - ENGLISH




If they answer not to thy call walk alone,
If they are afraid and cower mutely facing the wall,
O thou unlucky one,
open thy mind and speak out alone.


If they turn away, and desert you when crossing the wilderness,
O thou unlucky one,
trample the thorns under thy tread,
and along the blood-lined track travel alone.


If they do not hold up the light when the night is troubled with storm,
O thou unlucky one,
with the thunder flame of pain ignite thy own heart
and let it burn alone.


- Gurudev Ravindranath Tagore

Rahul Gandhi`s New Stunt

राहुल गाँधी आज के दौर में पुराने पड चुके राजनीतिक स्टंट दिखा रहे हैं जो यह साबित करता है की अभी उनमें परिपक्वता नहीं आई है. अभी भी वो चापलूसों से घिरे हैं और अपनी सुरक्षा को तोड़ देना ही सबसे महान काम समझते हैं. हालाँकि, यह भी संभव है की राहुल ऐसा करने को मजबूर हों. क्योंकि कांग्रेस पार्टी ऐसे दिग्गज नेताओं से भरी पड़ी है जो गाँधी परिवार का इस्तेमाल अपनी सुविधा के लिए करते हैं. 
ऐसे में, श्री अन्ना हजारे राहुल के लिए प्रेरणा बन सकते हैं और ताकत भी. राहुल को ये अवसर राजनीतिक स्टंट करके नहीं गवाना चाहिए बल्कि जनता का विश्वास जीतकर अपना आधार मजबूत बनाना चाहिए.

२० मई --लगता है की राहुल सुधरना ही नहीं चाहते हैं. मैं उन्हें क्या समझती थी और वो क्या निकले? फीलिंग वैरी लो !! कहते हैं ना, बुजुर्गों की पारखी नजर सब पहचान लेती है . सच ही कहा था श्री अच्युतानंदजी  ने, वो सच में 'अमूल बेबी' ही  हैं. हमारे पास बहुत कम ऑप्शन हैं अच्छे राजनेताओं के मद्देनजर. वैसे राहुल जल्दी ही समझ जायेंगे की जनता बेवक़ूफ़ नहीं है. वो अपना दम वोट देकर दिखा देगी. इनसे तो मायावती ही अच्छी हैं. हम्म.... वैसे बाबा रामदेव के बारे में क्या ख्याल है? गुड चोइस ना.

१० जून- वही हुआ जिसका अंदेशा था, बाबा रामदेव आ गए मैदान में और 'अमूल बेबी ' गायब हैं. चुनावों के समय तो सबने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था परन्तु राहुल गाँधी ने यह नहीं बताया था की वो कमाते क्या हैं मतलब उनकी आय का स्त्रोत क्या है? जैसे बाबा रामदेव ने बताया की उनकी आय कितनी है और वो किन मदों से कमाते हैं वैसे ही इन्हें भी अपनी आय-व्यय का ब्यौरा देने के साथ ही यह भी देश को बताना होगा कि उन्होंने ये संपत्ति जोड़ी कैसे है? इनके इटली के अकाउंट भी खंगाले जाने चाहिए ताकि सच्चे तौर पर पारदर्शिता आये और सबका कल्याण हो.

३ दिसंबर-जिन राहुल गांधीजी को यु पी के सी एम् ओ को मरते देख गुस्सा आता है उनको रात को लाठियों से पिट रहे बच्चे और औरतों को देख अपनी सरकार पर गुस्सा नहीं आता है, आतंकी दंगे उन्हें साधारण बात लगते हैं, पवार को चांटा बड़ी बात लगती है ?!! धन्य है यह देश जहाँ नेहरु-गाँधी के सपूत वो कर रहे हैं जो डायर और कर्जन के सपूत ना करते होंगे !! तरस आता है इन रसूखदारों पर, इनसे अच्छे तो वो नौजवान है जो अपाहिज हैं और अपनी हिम्मत से आपको आगे बढ़ने को प्रेरित कर देते हैं .

Bangal, TN, aur Kerala me badlaav ke maayane

Assembly Elections 2011
देश में हुए ताजा चुनावों ने यह साबित कर दिया है की अब पुरानी नेतागिरी नहीं चलेगी. जनता ने विकास को चुना है की नहीं ये तो वक़्त ही बताएगा परन्तु यह तो पता चल ही गया है की अब भ्रष्टाचार एक मिनट भी नहीं चलेगा. तमिलनाडु की भावी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कह दिया है की उनकी पहली चुनौती भ्रष्टाचार नहीं होने देना रहेगी साथ ही वो डेढ़ सालों में सभी योजनायें पूरी करवाएंगी. यह हो पायेगा की नहीं ये तो नहीं पता परन्तु राजनेताओं को यह समझ आ जाये की मनमानी नहीं चलेगी यही बड़ी बात है. उम्मीद है की जयललिता बदला लेने की जगह विकास पर ध्यान देंगी क्योंकि उनके चिर प्रतिद्वंदी को उनके ही राजा ले डूबे हैं. 

इस चुनाव में सबसे बहुप्रतीक्षित नतीजे आये हैं पश्चिम बंगाल से. ३४ साल पुराना किला ढहा है वाम का. ये ममता बैनर्जी ही हो सकती हैं जो इतनी लम्बी तपस्या कर बंगाल की जनता को आपनी आवाज सुनाने का मौका दे सकीं. उन्होंने हर तरह का प्रयास किया ताकि वो बंगाल की जनता का दिल जीत सकें और वाम को हरा सकें. निश्चित रूप से उन्हें राज्य के उच्च विकास के लिए केंद्र का समर्थन हासिल है जो सबसे महत्वपूर्ण बात है. ममता पुरानी कद्दावर नेता है और अच्छे से जानती हैं की कब कौन सा पैंतरा चलना चाहिए. 

असम व केरल में कांग्रेस को जीत मिली है परन्तु यह उतनी दमदा नहीं हिया जितनी की इन दो महिलाओं की जीत. इस तरह महिलाओं के राजनीति में आने से यह उम्मीद बांधती है की हमारे देश की राजनितिक व्यवस्था जल्द ही महिलाओं की बेहतरी के लिए स्थाई समाधान ढूंढेगी और देश को आगे ले जाने में मदद करेगी. इन नतीजों को एंटी इन्कम्बंसी भर नहीं मानना चाहिए, अब जनता परिवर्तन चाहती है अपनी परिस्तिथियों में ना की केवल पद पर बैठे चेहरों में . 





14.5.11

KHUSHII

दिल आज खुश है की बहार आई, दिल आज खुश है की धूप की चादर है छाई
Dil aaj khush hai ki bahaar aaii, dil aaj khush hai ki dhoop ki chadar hai chhaii
बहोत दिनों से पसरा था अँधेरा, कितने दिनों बाद उम्मीदों की हरियाली है छाई 
Bahot dinon se pasra tha andhera, kitne dinon baad ummeedon ki hariyali hai chhaii

कितने अरमानों से देखे थे सपने, उन सपनों की आहट है आई
Kitne armanon se dekhe the sapne, un sapnon ki aahat hai aaii
अंगडाई लेकर मुस्कान आई, अब नैनों में जान है आई 
Angadaii lekar muskaan aaii, ab nainon me jaan hai aaii

कब से उम्मीद के बादल दे रहे थे धोखा, अब जाकर बरसात है आई 
Kab se ummeed ke badal de rahe the dhokha, ab jaakar barsaat hai aaii
भीग गई ये सूखी धरती, विश्वास की कोंपल फिर से उग आई
Bheeg gai ye sukhi dharti, vishvaas ki konpalen fir se ug aaiin

बालों का पकाना सिखा गया कि, ग्रीष्म के बाद बहार ही आई 
Balon ka pakna sikha gaya ki, grishm ke baad bahar hi aaii
याद रहेगा ये सबक सोच कर ही आँखों में चमक है आई
Yaad rahega ye sabak soch kar hi aankhon me chamak hai aaii

दिल आज खुश है कि बहार आई, फिर से वो सपनों कि रंगीन दुनिया लाई 
Dil aaj khush hai ki bahar aaii, fir se wo sapnon ki rangeen duniya lai
पत्थर पे घिस घिस के हिना खुशबू वाला रंग है लाई 
Patthar pe ghi-ghis ke heena khushbu wala rang hai lai

इसके सिवा और ईश्वर से क्या चाहेगा कोई, आज' उसकी' बहोत याद आई  
Iske siwa aur Ishwar se kya chahega koi, aaj 'uski' bahot yaad aai
हल्का हुआ दिल, होठों पे है मुस्कान और, आँखों में श्रद्धा आंसू भर लाई 
Halka hua dil, hothon pe hai muskaan aur, aankhon me shraddha aansoon bhar lai .