4.12.12

झरोखा


जलते देखा
गरीब का झोपड़ा
अमीर दिल

झरोखे देखो
मुस्कुराते  दुपट्टे 
कंचन मन 

बूँद बूँद में
मुस्कुराती खुशियाँ
भीगी प्रकृति 

अग्नि तांडव
नख -शिख होकर 
वाष्पित तन 

ठठाती हंसी
बुदबुदाती दुआएं
नूरानी आँखें




16 comments:

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    1. धन्यवाद यशवंत जी .. आपने समय निकाला और टिपण्णी भी दी.

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  2. कल 08/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. लिंक शेयर करने का धन्यवाद यशवंत जी . मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा परन्तु अपनी रचना या लिंक नही मिला .

      साभार !

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  3. अग्नि तांडव
    नख -शिख होकर
    वाष्पित तन

    lajbab .....abhar.

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  4. आपको पहली बार पढ़ा ..........बहुत सुंदर रचना आप भी पधारें मेरा पता है http://pankajkrsah.blogspot.com आपका स्वागत है

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  5. सभी हाइकू लाजवाब .... कुछ शब्दों में गहरी बात ...

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    1. धन्यवाद सर

      आपके तारीफ के शब्द निश्चित ही मेरे हायकू का मान बढ़ा रहे हैं.

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  6. झरोखे देखो
    मुस्कुराते दुपट्टे
    कंचन मन

    वाह ! वाऽह !
    बहुत ख़ूबसूरत हाइकु !

    तमाम हाइकु अच्छे हैं ...

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