हरी - भरी धरा सबके लिए





कुछ साल पहले मैंने ईशा फाऊंडेशन नामक एक गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्था को "प्रोजेक्ट ग्रीन हैण्ड" के लिए १ हजार रुपये का योगदान दिया. यह संस्था सद्गुरु जग्गी वासुदेव के द्वारा स्थापित की गई है जिसके द्वारा मानव उत्थान के अनेक कार्य किये जाते हैं. प्रोजेक्ट ग्रीन हैण्ड का नाम 'लिम्का बुक ऑफ़ रेकोर्ड्स ' में दर्ज हुआ है और इसे दो बार इंदिरा गाँधी पर्यावरण पुरुस्कार भी मिला है. स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट ग्रीन हैण्ड में अपने ओर से किये गए छोटे से योगदान के लिए मैं बेहद गर्वित महसूस करती हूँ. 


एक दिन इस बारे में मेरी अपनी मित्र से बात हो रही थी कि उसने मुझसे बड़ा विचित्र प्रश्न किया , " वो लोग तमिलनाडु में पेड़ लगायेंगे न ... तो तूने उन्हें दान क्यों किया ? छत्तीसगढ़ में लगाते तो दे देती रुपये. " उफ्फ्फ ..... !!! मेरे दिमाग में ये लाख टके की बात कभी नहीं आई . सो मुझे इस प्रश्न का उत्तर भी नहीं पता था पर बस उसे शांत करने के लिए मैंने यों ही कह दिया " मेरी बेटी कभी तमिलनाडु जाएगी तो उसे फ्रेश हवा मिलेगी सूंघने इसलिए किया हा हा हा ! " मेरी मित्र ने मेरी तरफ यों घूरा जैसे हम किसी निपट मूर्ख को हंसते देख घूरते हैं. 


बहुत लोगों ने डांटा " तुम्हे पैसे की क़द्र नहीं है ... तुम भरोसे के लायक नहीं हो ...आदि आदि " . मैं टस से मस ना हुई. माना कि मैं सर्वश्रेष्ठ नहीं पर निरी मूर्ख ..... नो वे  ! मैंने सबकी बात सुन ली और याद कर लिया कि ये वे व्यक्ति हैं जो पैसे को भगवान् समझते हैं. सबकी अपनी - अपनी सोच है परन्तु भारत में असहिष्णुता बढती जा रही है. कोई किसी को सुनना समझना ही नहीं चाहता. खासकर जैसे अनुजों की बात मानना राष्ट्रीय मूर्खता घोषित कर दिया गया है. 


कुछ वर्षों बाद एक अन्य दिन फिर मेरी उसी मित्र से मुलाक़ात हुई. मेरी मित्र ने  पूरी दृढ़ता से अपनी बात बताई " वे  बहुत अच्छे हैं. भले ही वो मेरी बेटी के असल पिता नहीं हैं परन्तु बहुत अच्छे हैं. वो जरूर मेरी बच्ची के भविष्य की जिम्मेदारी ख़ुशी ख़ुशी उठाएंगे. " वो ठीक कह रही थी. मेरी मित्र के पहले पति की मृत्यु हो गई थी. जिन सज्जन ने उससे शादी की वे दयालु व्यक्ति हैं . वे  स्त्रियों और जीवन के प्रति तुच्छ सोच नहीं रखते हैं. 


हम नहीं जानते कब हमें किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता पड़ जाएगी. मेरा-तेरा का चक्कर सबको डुबो देता है. भारतीय परम्परा के पालक-पोषक ऋषि-मुनि अपने विशाल ह्रदय और अनुभव से हमें बताते रहे हैं, सबसे अच्छी नीति " वसुधैव कुटुम्बकम " है जो सबके हित में है. आज पर्यावरण दिवस है. प्रकृति को हरा-भरा बनाए रखने के लिए कुछ प्रयास करने चाहिए यह याद दिलाने का दिन है आज. इस जून पर्यावरण की रक्षा हेतु आप जो कर सकते हैं करें, अच्छा लगेगा . 


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