18.5.13

एक मीठी बूँद

एक मीठी बूँद
सर से अक्षुकोण तक
एक नमकीन बूँद
वहीँ अक्षुकोण पर
एक कम मीठी और कम नमकीन बूँद
अपने भार को संभालती
तेजी से लुढ़कती
गाल से ठोड़ी तक
तरबतर करती
सर से पैर तक

कुछ हल्का करते ...कहीं ...अन्दर
कुछ उजला करते ... गहनतम ... कहीं ... अन्दर
धरती का बोझ बढ़ाते
तीव्र गति से बढ़ती
कम मीठी
कम नमकीन
कम स्वच्छ
कीचड़ में बदलती

एक मीठी बूँद
नियति का क्रूरचक्र
समाती भीषण अग्नि में
सूख जाती वह
बिन राख 
कण कण बिखर

फिर कण कण जुड़ती 
बनती एक स्वच्छ बूँद 
आने सिर की सडकों पर 
मिलने पुनः अक्षुकोणों से 
करने हल्का नमकीन अक्षुजल ..
कहीं .. गहन .. अनंत विस्तार में 
समाने कीचड़ बन गंगा में 
फिर बरसने सबके ऊपर 
वहीँ उसी की जगह पर 
गंगा बनकर ......... 



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