25.7.11

Heena



Haathon ki lakeeron me,
Chaand aur taaron me,
Kahain nahi thi kismat,
Wo jo chahi nigahon ne,


Lalaat pe likha jo mit nahi sakta
To kya Iishputra sangharsh nahi kar sakta?
Jeevan sudha wahi peete hain
Jo naav ko samundar me dhakela karte hain


Rashq karte hain inse chanda aur taare
Ye insaan bhi kya khoob hua karte hain
Do haathon se ye kitni sundar rachna karte hain
Mastak oonchaa kar tan kar chalte hain


Ghis-ghiskar Arawali se Himalay ho jate hain
Anany ekaant me Saraswati se Jhelam ho jate hain
Koi naa chhin sakata hai inse ye hausala
Apne dam par ye Chaand par bhi chad jate hain


Jai hai is Kapi vansh ki
Jane kahan se chale the
Aur jane kahan ye jate hain
Inse to chand aur tare bhi rashq khate hain






हाथों  की  लकीरों  में ,
चाँद और  तारों  में ,
कहीं  नहीं  थी  किस्मत ,
वो  जो  चाही  निगाहों  ने ,

ललाट  पे  लिखा  जो  मिट  नहीं  सकता 
वह इंसान ही क्या जो  संघर्ष  नहीं  कर  सकता ? 
जीवन -सुधा  वही  पीते  हैं  
जो  नाव  को  समुन्दर  में  धकेला  करते  हैं 

रश्क  करते  हैं  इनसे  चंदा  और  तारे 
ये  इंसान  भी  क्या  खूब  हुआ  करते  हैं 
दो हाथों  से  ये  कितनी  सुन्दर  रचना  करते  हैं 
मस्तक  ऊंचा  कर  तन  कर  चलते  हैं 

घिस -घिसकर  अरावली  से  हिमालय  हो  जाते  हैं 
अनन्य  एकांत  में सरस्वती  से  झेलम  हो  जाते  हैं 
कोई  ना  छीन  सकता  है  इनसे  ये  हौसला 
अपने  दम  पर  ये  चाँद  पर  भी  चढ़  जाते  हैं 

जय  है  इस  कपि वंश  की 
जाने  कहाँ  से  चले  थे  
और  जाने  कहाँ  ये  जाते  हैं 
इनसे  तो  चाँद  और  तारे  भी  रश्क  खाते  हैं 




No comments:

Post a Comment

SHARE YOUR VIEWS WITH READERS.