24.7.11

Lehar

chhoti si chanchal lahar chalti ja rahi thi mast kalandar
dheeme-dheeme, lahrate- lahrate, ithalate jaise na jane kya tha paas


yahi to hai sach ki usey pata na tha ki kya hai paas
yahi to maja hai ki nahi pata tha ki kya nahi hai paas


wo chalti ja rahi thi ithalati balkhati, bade maje se
kabhi munh se laar giraati to kabhi dhamm se girati


hansati jati jaise koi majak kar raha tha usase
wo kya thi nahi pata tha usey


ghumti poore samudra me, chhann-chhann payal bajaati
paas se nikalti har badi-booddhi lahar leti balaiyan


fir girat fir hasati, fir uthati, fir girati fir hansati
wo kya thi nahi pata tha usey, kya nahi tha nahi pata tha usey


har chattan usaki dost, har musafir uska dost
sabko batati apni girne-utthane ki kahani


chhoti thi par sabki thi nani
thake ko uthati, tej ko bachaati pyari-si bitiya rani








छोटी  सी  चंचल  लहर  चलती जा  रही  थी  मस्त  कलंदर 
धीमे -धीमे , लहराते - लहराते , इठलाते  जैसे  न  जाने  क्या  था  पास 

यही  तो  है  सच  की  उसे  पता  न  था  की  क्या  है  पास 
यही  तो  मजा  है  की  नहीं  पता  था  की  क्या  नहीं  है  पास 

वो  चलती  जा  रही  थी  इठलाती  बलखाती , बड़े  मजे  से 
कभी  मुंह  से  लार  गिराती  तो  कभी  धम्म  से गिरती 

हंसती  जाती  जैसे  कोई  मजाक  कर  रहा  था  उसके साथ 
वो  क्या  थी वो नहीं  पता  था  उसे, वाह क्या बात 

घूमती  पूरे  समुद्र  में , छन् -छन्  पायल  बजाती 
पास  से  निकलती  हर  बड़ी -बूढ़ी  लहर  लेती  बलैयां  

फिर  गिरती   फिर  हंसती , फिर  उठती , फिर  गिरती  फिर  हंसती 
वो  क्या  थी  नहीं  पता  था  उसे , क्या  नहीं  था  नहीं  पता  था  उसे 

हर  चट्टान  उसकी  दोस्त , हर  मुसाफिर  उसका  दोस्त 
सबको  बताती  अपनी  गिरने -उत्थाने  की  कहानी 

छोटी  थी  पर  सबकी  थी  नानी , बनाती ऐसी ऐसी कहानी  
थके  को  उठती , तेज  को  बचाती  प्यारी -सी  बिटिया  रानी  

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