16.6.17

मिस भार्गव

स्कूल के दिनों में सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट होती है कक्षा के बाहर का नजारा दिखाती खिड़की 🤗 ... नहीं वहां देख नहीं सकते थे क्योंकि वहां पर तो मैम बैठती थी जिन्हें हम 'मिस' कहते थे । सबसे पहले मिस नाग का पीरियड होता था। रसायन शास्त्र से कक्षा प्रारंभ हो , जिसे अंग्रेजी में केमिस्ट्री बोलते हैं । शुरू के 1 हफ्ते तो कुछ समझ में नहीं आया... किताब पढ़े. उलट-पुलट की। लगा कि रसायन का भौतिक वाला पोर्शन मजेदार है... उसके बाद ऑर्गेनिक केमिस्ट्री बेंजीन के सुंदर-सुंदर चित्र के कारण अच्छी लगने लगी पर ... इनऑर्गेनिक 'तमस' सीरियल की पुकार के 'हाय रब्बा' जैसी भयानक लगती थी।

हे..हे... कुछ स्कूल की टीचर्स से मैं अब फेसबुक के माध्यम से जुड़ी हुई हैं... लिखूं कि नहीं लिखूं ....लिखी देती हूं ... सभी मुझे माफ करेंगे .. मैं जानती हूं ☺☺

मिस नाग के बाद हमारी फेवरेट टीचर मिस परवीन आती थीं । मिस परवीन हमको बायोलॉजी पढ़ाती थीं.. और क्योंकि .... हम उनको बहुत पसंद करते थे इसलिए पूरा जोर लगाते थे सभी बच्चों की तरह... कि हम पर विशेष ध्यान दिया जाए .. इसलिए बराबर पूछना... बताना ...मैम के काम में उनकी मदद करना हर चीज का पूरा ध्यान रखते थे 😀😀

इसके बाद शार्ट लंच होता था जिसमें हम लोग कुछ खास नहीं करते थे । तीसरे और चौथे पीरियड फिजिक्स के और इंग्लिश के होते थे। फिजिक्स की क्लास में बहुत मजा आता था .. न्यूटन के नियम पढ़ो ,लेंस पढ़ो ,नेत्र पढ़ो, चुंबक के प्रयोग करो, हमारा लैब बहुत अच्छा था.. हम लोग बहुत एंजॉय करते थे वहाँ.. पहले पढ़ते थे और फिर 6th और 7th पीरियड में लैब में सब सीखते थे 👍👍

आप सोच रहे होंगे इसमें क्या खास है ऐसा तो सभी स्कूल में होता है पर हमारे यहां खास कक्षा होती थी लंच के बाद 5th पीरियड...

यह कक्षा हिंदी विषय को समर्पित होती थी । खाने के बाद और 4 क्लास हैवी हैवी देखने के बाद किसी का मन ना हो हिंदी पढ़ने का ... पर हिंदी की मैडम वैसे ही होती है जैसे की हिंदी की मैडम होती हैं.... मिस भार्गव। टिपिकल हिंदी की मैडम एक गंभीर चेहरा ... आंखों पर चश्मा .... और एक पाठ की व्याख्या 1 से 2 महीने तक करना । अब आप सोचिए.. हिंदी में 50 में 48 ऐसे ही नहीं आते थे हमारे.. इसके लिए हमारी टीचर ने बहुत मेहनत की थी।

मिस भार्गव अक्सर पढ़ाते-पढ़ाते खिड़की के बाहर देखती थीं और हम इतने बदमाश थे कि मिस भार्गव के बिल्कुल अपोज़िट साइड में ... सबसे पीछे बैठते थे ...परंतु जब मिस भार्गव बाहर देखें... तो हम भी अपनी जगह से थोड़ा सा उठकर खिड़की से झांकने की कोशिश करते थे कि वे बाहर क्यों देख रही हैं... क्या देख रही हैं 😂😂😂😂 अरे ...क्यों नही देख सकते थे ... हमारी क्लास सेकंड फ्लोर में थी... थोड़ा बहुत तो ऐसे भी दिख ही जाता तो बाहर का 😃😃 उसके बाद जब मिस वापस हमारी तरफ देखें तो जल्दी से बैठ कर ऐसे भोलेपन से मुस्कुराते थे कि बाल कृष्ण भी हमसे हार जाते भोलेपन में 😀😀

मिस भार्गव की तरफ से कोई रिएक्शन कभी नहीं मिलता। ऐसा लगता जैसे हम लोगों का कोई अस्तित्व ही नहीं है... exist ही नहीं करते। ना नमस्ते का जवाब देती ... ना कभी हालचाल पूछती .. कुछ नहीं । तो हुआ यूँ कि हम शादी अटेंड करने रायपुर गये कुछ दिन को और लौट के आए तो हमारी सहेली ने आश्चर्यचकित बम फोड़ दिया यह कहकर की मिस भार्गव पूछ रही थीं कि संज्ञा कहां है... आ क्यों नहीं रही है ?  हम बड़ी- बड़ी गोल आंखों से अपनी सहेली को देखने लगे के मिस भार्गव हम को कैसे याद करने लगीं ???

टिफिन के बाद फिर क्लास की घंटी बजी और फिर 5th पीरियड शुरु हुआ । मिस भार्गव फिर वही गंभीर अंदाज़ लिए क्लास में आईं और पढ़ाने लगी हमारा फेवरेट पाठ ...आचार्य रामचंद्र शुक्ल का निबंध 'क्रोध'। फिर वही उसी लाइन की व्याख्या शुरू हुई कि बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा होता है। मतलब क्रोध धीरे धीरे मन में बैर बनके बस जाता है जैसे कोई मुरब्बा समय के साथ और तैयार होता जाता है। हम शादी में जाने के पहले ही क्लास इसी लाइन पर छोड़कर गए थे ।बताइए पूरी शादी निपट गई ..आना-जाना निपट गया और क्रोध का फिजिकली..  यदि हो सकता होगा तो.... मुरब्बा बन गया.....  😂😂😂

शादी से लौटने के बाद हमने एक बात नोटिस की कि.. हिंदी की क्लास में सब बैग के पीछे मुंह छुपाकर या किताब के नीचे मुंह छिपाकर सोते थे। सिर्फ हम थे जो मिस भार्गव से पढ़ते थे ... उनका पढ़ाया समझते थे...  और उनको ..और उनकी खिड़की को देखते थे... वह भी .. प्यार से .. मुस्कुराकर  ...............।

😇😇😇😇😇

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