SAARC Summit in Maldives - Sorry Kasab !!


1983 में गठित सार्क संगठन का मुख्य उद्देश्य था दक्षिण एशियाई देशों के मध्य आपसी सहयोग और व्यापर बढ़ाना. साथ ही, सदस्य देशों के मध्य शांति सुनिश्चित करना. परन्तु ऐसा ना होकर सार्क मात्र आपसी लड़ाई का अखाडा बन गया है . जब भी मुद्दे की कोई बात हो भारत और पकिस्तान एक दूसरे को आँख दिखने लगते हैं और बैठक बेनतीजा ख़त्म हो जाती है.

आज जाकर पाकिस्तानी गृहमंत्री रहमान मालिक ने मीडिया के सामने माना कि कसाब आतंकी है और मुंबई बम ब्लास्ट का दोषी है अतः उसे फंसी होने चाहिए परन्तु उसे पाकिस्तानी नागरिक मानने से इनकार कर दिया. जिसका मुझे बहुत दुःख है. पहले तो ये अपने बच्चों को जुर्म और नफ़रत की राह पर ले जाते है, उनकी गरीबी का फायदा उठाकर धर्म के नाम पर मरने मारने को तैयार करते हैं और जब खुद पर बात आती है तो अपने ही बच्चों से आँखें फेर लेते हैं. बड़ा आश्चर्य हुआ जानकार, जब इनमे हिम्मत ही नहीं है तो ये हिंदुस्तान से लड़ते ही क्यों है?

पाकिस्तान मुंबई हमलों के मुख्य रचयिता हाफिज़ सईद को अपने देश में सजा नहीं दिलवा पा रहा है, या दिलवाना ही नहीं चाहता. कोर्ट में कसाब ने खुद कबूला है कि हाफिज़ सईद ही ट्रेनिंग देता है और वही है मुंबई बम धमाकों का रचयिता. अब पाक किसी प्रकार से जिन्दा बम कसाब से छुटकारा चाहते हैं ताकि उनपर लगा दाग धुंधला हो जाये. इसी लिए पाक भगवा आतंकवाद की आड़ लेकर बचना चाहता है ताकि उसे आगे भी आतंक की रोटी खाने मिलती रहे. एक राष्ट्र के रूप में कितनी छोटी समझ पाकिस्तान की है यह दिख रहा है. देखना है कि कब तक चीन की मिलीभगत से पाकिस्तान भारत को आँखें दिखाता रहेगा?

सॉरी कसाब!! सच में, ये लोग किसी के सगे नहीं है, इनके लिए जान देने वालों तक के नहीं तो ये भारत से क्या पडोसी धर्म निभाएँगे? 

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